टॉन्सिल (टॉन्सिलाइटिस) के लक्षण कारक उपचार व घरेलु उपाय Tonsillitis Symptoms Causes Treatment In Hindi

 टॉन्सिल (टॉन्सिलाइटिस) के लक्षण कारक उपचार व घरेलु उपाय Tonsillitis Symptoms Causes Treatment In Hindi

Tonsillitis Symptoms Causes Treatment In Hindi

टॉन्सिल क्या है ?

गले में पीछे की तरफ़ दायें व बायें एक-एक टान्सिल (Tonsil) होता है जो कि वास्तव में विशिष्ट ऊतकों का अण्डाकृतिक गुच्छ हैं। जीवाणुओं अथवा विषाणुओं के कारण टान्सिल में सूजन आ जाने को टान्सिलाइटिस कहा जाता है। ध्यान रखें कि एडिनायडाइटिस अलग स्थिति है जिसमें एडिनाइड्स में सूजन आ जाती है।

एडिनाइड्स लसिकीय ऊतक का एक गुच्छ होता है जो संक्रमण से लड़ने में सहायता करता है। एडिनाइड्स गले में ग्रसनी (फ़ैरिंक्स) में नासिका के ठीक पीछे पाये जाते हैं। टान्सिल्स के समान एडिनाइड्स भी विषाणुओं व जीवाणुओं के विरुद्ध प्रथम पंक्ति की प्रतिरक्षा-प्रणाली हैं। यहाँ हम मुख्यतः टान्सिलाइटिस की चर्चा करेंगे.

Tonsillitis Symptoms Causes Treatment In Hindi

Tonsillitis couses and treatment,Tonsillitis Symptoms Causes Treatment In Hindi
Tonsillitis causes treatment

टान्सिल्स संक्रमित ही क्यों होते हैं ?

टान्सिल्स (Tonsil) मुख में प्रवेश कर रहे जीवाणुओं व विषाणुओं के विरुद्ध प्रथम पंक्ति की प्रतिरक्षा-प्रणाली में गिने जाते हैं। इस कारण टाॅन्सिल्स संक्रमण व सूजन आदि के प्रति संवेदनशील होते हैं। वैसे किशोरावस्था आरम्भ होने के बाद टाॅन्सिल का प्रतिरक्षा-कार्य सिमट जाता है जिससे बड़ों में यह रोग कम ही देखने में आता है।

जोख़िम-कारक

कम उम्र- 5 से 15 साल के बच्चों को जीवाणुओं से होने वाला टान्सिलाइटिस अधिक आसानी से हो जाता है।

रोगाणुओं से बारम्बार सम्पर्कः शालेय बच्चे अपने संगी-साथियों के माध्यम से अन्य बच्चों के जीवाणुओं व विषाणुओं के सम्पर्क में सरलता से आ जाते हैं।

टॉन्सिल से जुडी जटिलताएँ

टान्सिलाइटिस बना रहे अथवा बार-बार होने लगे तो ये जटिलताएँ आ सकती हैं..

*. निद्रा के दौरान साँसें उखड़नाः आब्स्ट्रक्टिव स्लीप एप्निया.

*. आसपास के ऊतक में संक्रमण का गहरा प्रसारः टान्सिलर सेल्युलाइटिस.

*. संक्रमण के परिणामस्वरूप टान्सिल के पीछे मवाद जमनाः पेरिटान्सिलर एब्सेस.

*. यदि ग्रुप-ऐ स्ट्रेप्टोकोकस अथवा अन्य विभेद (स्ट्रैन) के स्ट्रेप्टोकोकल जीवाणुओं द्वारा हुए टान्सिलाइटिस का उपचार न कराया जाये अथवा  प्रतिजैविकों से उपचार अधूरा छोड़ दिया गया हो तो बच्चे में कुछ दुर्लभ विकार पनप सकते हैं, जैसे कि..

  • र्ह्यूमेटिव फ़ीवर- इस गम्भीर सूजनात्मक स्थिति से हृदय, संधियों, तन्त्रिका-तन्त्र व त्वचा पर प्रभाव पड़ सकते हैं.
  • पोस्टस्ट्रेप्टोकोकल रियेक्टिव आथ्र्राइटिस जिसमें संधियों में सूजन हो जाती है.
  • स्कार्लेट फ़ीवर की जटिलता- इसमें सुस्पष्ट चकत्तों के साथ स्ट्रेप्टोकोकल संक्रमण रहता है.
  • वृक्कों में सूजन- पोस्टस्ट्रेप्टोकोकल ग्लोमेरुलोनेफ्ऱाइटिस.

टान्सिलाइटिस के लक्षण

टान्सिलाइटिस में मुख्यतः गले व मुख पर प्रभाव पड़ता है, बड़ों में भी हो सकने वाला यह रोग बच्चों में तो आसानी से हो जाने वाला रोग है जिसके कुछ लक्षण निम्नांकित हो सकते हैं..

*. इसमें टान्सिल्स में सूजन आ जाती है जो लाल अथवा फूले हुए नज़र आते हैं.

*. टान्सिल्स पर सफेद अथवा पीली तह अथवा निशान.

*. ख़राब गला व आवाज़ में परिवर्तन.

*. निगलने में कठिनता, यदि छोटा बच्चा है तो हो सकता है कि निगलने में कष्ट के कारण उसकी लार बाहर बह रही हो अथवा खाने से मना कर रहा हो अथवा असामान्य रूप से चिड़चिड़ा रहा हो अथवा असामान्य थकावट लग रही हो.

*. गर्दन के पाष्र्वों में कोमल पड़ चुके लिम्फ़नोड्स जिनका आकार बढ़ा हुआ लग सकता है.

*. गर्दन में दर्द अथवा कड़ाई.

*. पेटदर्द.

*. सिरदर्द.

*. मुख व साँसों में दुर्गन्ध.

*. बुखार.

*. साँस लेने में कठिनाई.

*. यदि उपरोक्त के साथ शरीर के अन्य भागों में दर्द, मितली, उल्टी, मुख के पिछले भाग में छोटे-छोटे लाल धब्बे दिखें तो स्ट्रेप थ्राट नामक एक अन्य रोग भी हो सकता है जो कि समान प्रकार के जीवाणु से हो सकता है। निदान व उपचारों में भी समानता होती है.

टॉन्सिल होने के कारक

टान्सिलाइटिस प्रायः सामान्य विषाणुओं से होता है परन्तु जीवाण्विक संक्रमणों से भी यह हो सकता है। जीवाण्विक संक्रमण की स्थिति में टान्सिलाइटिस लाने वाला जीवाणु प्रायः स्ट्रेप्टोकोकस पायोजीन्स (ग्रुप-ऐ स्ट्रेप्टोकोकस) होता है। विषाण्विक टान्सिलाइटिस प्रायः कामन कोल्ड वायरसेज़ से हो जाता है किन्तु अन्य विषाणु भी टान्सिलाइटिस कर सकते हैं- र्हाइनोवायरस, एप्स्टीन-बार्र वायरस, हिपैटाइटिस-ऐ एवं एचआईवी।

चूँकि एप्स्टीन-बार्र वायरस से मोनोन्युक्लियोसिस एवं टान्सिलाइटिस दोनों हो सकते हैं इसलिये ऐसा भी हो सकता है कि मोनोन्युक्लियोसिस के बाद टान्सिलाइटिस का आना द्वितीयक संक्रमण के रूप में हुआ हो।

टॉन्सिल से निदान

*. चिकित्सक सर्वप्रथम गले का नेत्रीय अवलोकन करता है ।

*. बाद में गले का पिछला भाग हल्के से खुरचते हुए थ्रोट-कल्चर के लिये कोशिकाओ प्राप्त कर सकता है ताकि प्रयोगशालेय परीक्षण से संक्रमण का कारण पता किया जा सके।

*. चिकित्सक रक्त-परीक्षण के लिये रक्त का सैम्पल भी ले सकता है ताकि कम्प्लीट ब्लड काउंट कराया जा सके। इसके साथ यह पता लगाना सरल हो जाता है कि संक्रमण विषाणु से हुआ है अथवा जीवाणु से।

टॉन्सिल का उपचार

यदि अपने आप अथवा प्रतिजैविक औषधियों आदि से टान्सिलाइटिस ठीक न हो रहा हो अथवा बारम्बार हो जाता हो अथवा लक्षणों से राहत न मिल पा रही हो अथवा जटिलताएँ आ रही हों तो शल्यक्रिया की आवश्यकता होती है ताकि आगे की जटिलताओं से बचा जा सके। टान्सिल्स को हटाने की शल्यक्रिया को टान्सिलेक्टामी कहते हैं।

टॉन्सिल से कैसे करे बचाव

*. टान्सिलाइटिस लाने वाले विषाणु व जीवाणु संक्रामक होते हैं, इसीलिये निज स्वच्छता बरतना बेहतर है।

*. बच्चों को सिखायें (स्वयं भी अपनायें) कि हाथों को आवश्यकतानुसार व समय-समय पर भी धोते रहना है, विशेषतया मलमूत्रोत्सर्ग के बाद एवं भोजन से पहले।

*. खाना-पीना व बर्तनों या बोतल को साझा करने से बचें।

*. वैसे तो टूथब्रश समय-समय पर नया लाते रहना चाहिए किन्तु एक बार टान्सिलाइटिस की पुष्टि कर दी गयी हो उसे तुरंत बदल दें।

*. छींकते-खाँसते समय अपने पास रखे निजी रुमाल का प्रयोग करें, यदि कुछ न हो तो अपनी बाँह का। बाद में हाथ धोना याद रहे।

टॉन्सिल ठीक करने के घरेलु उपाय

1. जल आदि रूपों में नैसर्गिक तरल-सेवन बढ़ायें, अन्यथा पानी की कमी की पूर्ति के लिये बोतल चढ़वाने की आवश्यक आन पड़ सकती है।

2. गुनगने खारे पानी से गरारे करें (दिन में कई बार) ।

3. कमरे में नमी बनाये रखें ।

4. मुलहठी या लौंग चबायें ।

5. धूम्रपान न करें ।

तो ये थी हमारी पोस्ट टॉन्सिल (टॉन्सिलाइटिस) के लक्षण कारक उपचार व घरेलु उपाय, Tonsillitis Symptoms Causes Treatment In Hindi,tonsil thik karne ke ghare upay . आशा करते हैं की आपको पोस्ट पसंद आई होगी और tonsil treatment at home in hindi की पूरी जानकारी आपको मिल गयी होगी. Thanks For Giving Your Valuable Time.

इस पोस्ट को Like और Share करना बिलकुल मत भूलिए, कुछ भी पूछना चाहते हैं तो नीचे Comment Box में जाकर Comment करें.

Follow Us On Facebook

Follow Us On Telegram

Add a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *