मानसिक बीमारियो को कैसे पहचानें व सँभालें Mental Health Reasons Symptoms Treatment In Hindi

मानसिक बीमारियो को कैसे पहचानें व सँभालें Mental Health Reasons Symptoms Treatment In Hindi

Mental Health Reasons Symptoms Treatment In Hindi

मनोरोग क्या होते हैं ?

मनोरोग (मनोविकार व मानसिक बीमारियाँ) ऐसी स्थितियाँ हैं जिनसे व्यक्ति की सोच, मनोस्थिति, अनुभूति व व्यवहार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा होता है। ये स्थितियाँ कभी-कभी होने वाली व दीर्घकालिक हो सकती हैं। इनसे दूसरों के साथ सम्बन्ध बनाने, बनाये रखने एवं लोक-व्यवहार की अन्तक्रियाएं प्रभावित हो सकती हैं।

मनोचिकित्सा कराना पाग़लपन नहीं बल्कि सजगता की निशानी है। सर्वप्रथम ‘ पागल’ व ‘पागलखाने ’ जैसे शब्दों का प्रयोग छोड़ें तथा मनोरोगी को पीटकर पलंग से बुरी तरह बाँधकर करंट लगाने वाले धारावाहिक देखने बन्द करें जिनसे आपके मन में मनोरोग व मनोचिकित्सा के बारे में गलत धारणाएँ घर कर गयी हैं। मनोचिकित्सक के पास जाने को कोई अजीब बात न समझें, यदि कोई ऐसा सोचता भी है तो उसे सोचने दें, आप केवल अपनी व अपनों की चिंता करें।

आजकल तो तनाव, भीड़भाड़ व दिनचर्या की सामान्य परेशानियों के चलते सामान्य वेतन पाने वाले शासकीय व अशासकीय कर्मचारी सहित अभिनेता तक मनोचिकित्सकों से मिलते हैं ताकि सामान्य मानसिक स्थितियों को बचाकर रखा जा सके एवं मनोरोग यदि कोई सामने आता है तो शीघ्र उससे निपटारे के प्रयास शुरु किये जा सकें ताकि रोगी पर एवं आसपास के लोगों पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों को न्यूनतम किया जा सके।

Mental Health Reasons Symptoms Treatment In Hindi

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शारीरिक व मानसिक रोगों के अतिरिक्त मनोशारीरिक और मनोजैविक रोग भी होते हैं जिनमें मन से शरीर के प्रभावित होने से दैहिक और शारीरिक लक्षण दिखते हैं, जैसे कि विष रहित सर्प के द्वारा काटे जाने के बावजूद व्यक्ति की मृत्यु (क्योंकि उसे विषयुक्त समझ वह इतना डर गया था कि हृदयाघात् हो गया)। ऐसे ही कई लोग किसी विशिष्ट खाद्य-तैल को अपने लिये एलर्जिक मानते हैं (जो प्रायः एलर्जिक नहीं होता).

इस कारण यदि उन्हें बिना बताये उस तेल में खाना पकाकर दिया जाये तो उन्हें कुछ नहीं होगा परन्तु यदि उन्हें बोला जाये कि उस तैल में खाना एक महीने से खिलाया जा रहा है (जबकि वास्तव में नहीं खिलाया जा रहा हो) तो हो सकता है कि व्यक्ति में पेट ख़राब होने इत्यादि लक्षण वास्तव में दिख सकते हैं (ध्यान रहे कि झूठ बोलने को बढ़ावा देना हमारा उद्देश्य नहीं है)।

मन शरीर से अधिक शक्तिशाली होता है – शारीरिक प्रभाव को उत्पन्न करने में भी। भय व आशंकाएँ सोच-सोचकर व्यक्ति उन वस्तुतः शारीरिक दशाओं को उत्पन्न कर देता है जो इस सोच से बचकर रोकी जा सकती थीं.

इसी प्रकार प्लेसबो इफ़ेक्ट को समझना भी आवश्यक है जिसमें वैज्ञानिक क्रियाकलाप करते हुए रोगियों को औषधि के नाम पर खाली कैप्सूल व पानी दिया गया (यह बोलकर कि इसमें दवाई है) किन्तु अधिकांश रोगी सच में ठीक जैसे होने लगे (क्योंकि वे मन से ऐसा मान बैठे कि वास्तव में यह तो औषधि है जिससे मन के प्रभाव वश उनके शरीर ने भी रोगो पचार की दिशा में कार्य करना शुरु कर दिया था)।

मनोरोगों के कारणों व प्रभावों व लक्षणों को अलग-अलग समझना कठिन है क्योंकि हो सकता है कि जिसे प्रभाव समझा जा रहा हो वह कारण हो व जिसे कारण समझा जा रहा हो वह प्रभाव हो व दोनों का अस्तित्व एक साथ हो व दोनों एक-दूसरे को लगातार बढ़ा रहे हों व बनाये हुए हों। प्रायः जीवन के कष्टप्रद अनुभव मनोरोगों को जन्म दे देते हैं एवं ये ही अनुभव इन रोगों से और बढ़ने व फलने-फूलने लगते हैं।

वैसे यह आवश्यक नहीं कि कष्टप्रद जीवनानुभव से व्यक्ति मनोरोगी बन ही जायेगा, स्वयं को एवं आसपास के लोगों द्वारा संयम, धैर्य इत्यादि का महत्त्व समझना और समझाया जाना आवश्यक है।

यह भी उल्लेखनीय है कि अन्य अनेक शारीरिक रोगों के समान कई मनोरोगों में कोई एक लक्षण न होकर लक्षणों का समूह होता है जिसे संलक्षण (सिण्ड्राम) कहा जाता है।

मानसिक बीमारी के सम्भावित कारण व लक्षण –

1. आनुवंशिक

2. कष्टप्रद जीवनानुभव – तनाव, अतीत का उत्पीड़न ( विशेष तौर पर बाल्यावस्था के दौरान ), बेरोज़गारी, प्रियजन का मरण, ऋणग्रस्तता व अन्य आर्थिक समस्याएँ, परिवार-परित्यक्ता स्थिति, बाँझपन, नपुंसकता, वैवाहिक विवाद, घरेलु व बाहरी हिंसा, मानसिक आघात्, विशेष तौर पर जटिल पारिवारिक परिस्थितियों व पृष्ठभूमि के कारण भावनात्मक उपेक्षा व पारिवारिक कलह के बीच पलना

3. यौनइच्छा में कमी व अधिकता (इस विषय में कामेच्छा मिटाने के उपाय जरुर पढ़ें, कई मनोरोगों में व्यक्ति हस्तमैथुन, बलात्कार व अन्य अप्राकृतिक व चरम लैंगिक क्रियाओं में लिप्त होने लगता है)

4. पोर्नोग्राफी

5. इण्टरनेट – बारम्बार Smartphone खो जाने का भय व बिना उसके न रह पाने जैसा मनोविकार ‘नोमोफ़ोबिया’ कहलाता है किन्तु वास्तव में तथाकथित Social Media व Data Connection इत्यादि से व्यक्ति के अवचेतन पर इतने गहरे प्रभाव पड़ते हैं कि वह व्यक्ति अपने उस रूप से एकदम अलग हो जाता है जो वह बिना मोबाइल आदि के होता, बहुत सारे मनोरोगों, शारीरिक रोगों इत्यादि की जड़ है Internet.

मानसिक बीमारी के मुख्य केवल कारण –

1. हिंसक व अन्य वीडियोगेम

2. हीनभाव

3. ईर्ष्या

4. जैविक कारक, जैसे कि मस्तिष्क में रासायनिक असंतुलन

5. ट्रामेटिक ब्रैन-इन्ज्युरी, जैसे कि सिर में चोट

6. तन्त्रिका-तन्त्र में कोई संक्रमण, मस्तिष्क, रीढ़ व अन्यत्र

7. गर्भावस्था में विषाणुओं व विषाक्त रसायनों से गर्भवती का सम्पर्क

8. औषधियाँ – जैसे कि उच्चरक्तचाप के उपचार में दी जाने वाली कुछ औषधियाँ

9. मादक द्रव्य (धूम्रपान, मद्य, गुटका इत्यादि समस्त) व क्रियाएँ

10. मिर्गी, स्ट्रोक, कैन्सर जैसी कोई गम्भीर चिकित्सात्मक स्थिति

11. सामाजिक व पारिवारिक बहिष्कार व ऐसी कोई मानसिक यंत्रणा जिसमें व्यक्ति को अजीब अकेलापन लगे, मित्रों व परिजनों में बर्बाद जीवन भी पढ़ा जा सकता है।

मनोरोग की उपस्थिति के मुख्यतः केवल लक्षण –

1. दैहिक अंगों व क्रियाकलापों पर प्रभाव, जैसे कि थकान, कहीं दर्द (पेटदर्द, पीठ दर्द, सिरदर्द व अन्यत्र किसी प्रकार की चुभन व पीड़ा) व नींद सम्बन्धी अनियमितताएँ व भूख-प्यास व शीत-ऊष्ण आदि का अनुभव व मालूम उतना न हो पाना

2. अवसाद – भावनात्मक रूप से हताश व भयभीत अनुभव करना।

3. आत्महत्या के बारे में सोचना व ऐसा लगना कि कोई आपको हानि पहुँचाने वाला है

4. स्पष्ट न सोच पाना

5. भूल-भूल जाना

6. आक्रामक होना व बात-बात पर व बिना बात के रक्षात्मक हो जाना

7. निराधार कल्पनाएँ – विचित्र इन्द्रियबोध, जैसे कि ऐसे स्वर व ध्वनियाँ सुनायी देना जिन्हें दूसरे सुन नहीं सकते तथा ऐसा कुछ दिखायी देना जिसका कोई दृष्यात्मक आधार व स्रोत उपस्थित नहीं है।

8. माया

9. विभ्रम

मानसिक बीमारी के प्रकार –

*. चिंता (एन्ज़ाईटी) सम्बन्धी विकार – जैसे कि संत्रास (पॅनिक) विकार, आब्सेसिव कम्पल्सिव डिसआर्डर व भीतियाँ (फ़ोबियाज़)

*. अवसाद, बाईपोलर डिसआर्डर एवं अन्य मनोअवस्थागत विकार

*. ईटिंग डिसआर्डर

*. पर्सनाल्टी विकार

*. पोस्ट-ट्रामेटिक स्ट्रेस डिसआर्डर

*. सायकोटिक डिसआडर्स, जैसे कि शाइज़ोफ्रे़निया इत्यादि

मानसिक बीमारी की जाँच –

*. व्यक्ति व कुटुम्ब का चिकित्सात्मक अतीत परखना

*. शारीरिक परीक्षण एवं प्रयोगशालेय जाँचें, जैसे कि मस्तिष्क की संरचनाओं में संरचनात्मक विकृति को व रुधिर में मानसिक स्थिति को प्रभावित कर सकने वाले हार्मोन-स्तरों की जाँच

*. मनोवैज्ञानिक मूल्यांकन (व्यक्ति से पूछताछ करके उसकी विचारधारा, अनुभूतियों एवं व्यवहारों का पता लगाना)

मानसिक बीमारी के उपचार –

मनोरोगों को असाध्य समझ लिया जाता है किन्तु यदि कुछ मनोरोग असाध्य वास्तव में हों भी फिर भी स्थिति को सँभालने एवं रोगी की मानसिक व शारीरिक दशा को सामान्य रखने के समस्त प्रयास तो करने ही चाहिए, असाध्य तो कई शारीरिक रोग (Body Illness) भी होते हैं तो भी उनमें रोगी को अकेले नहीं छोड़ दिया जाता, उसे ठीक करने, रोग के लक्षणों में थोड़ी-बहुत राहत देने व जीवन-प्रत्याशा बढ़ाने के भरसक प्रयास जरुर किये जाते हैं।

रोगी की स्थिति को देखकर निर्णय किया जाता है कि उसे परामर्श देकर व कुछ औषधियाँ लिखकर घर भेज देना है व समय-समय पर मनोवैज्ञानिक परामर्शन के लिये बुलाना है व भर्ती करना है व उसके घरवालों को उसकी देखभाल के लिये प्रशिक्षित करना है व नर्स और कम्पाउण्डर व अन्य किसी प्रशिक्षित को उसकी देखरेख हेतु उसके घर साथ रहने भेजना है, अधिकांश मामलों में रोगी को औषधियों व कुछ भेंटों में मनोवैज्ञानिक परामर्षण से लाभ पहुँच जाता है।

वैसे रोगी के परिजनों को भी समझदार, सतर्क व जागरुक रहकर उसकी देखरेख करनी ही चाहिए। निराश न होकर विभिन्न विशेषज्ञताओं के चिकित्सकों व वैज्ञानिकों को विश्वभर में जाँच-रिपोट्र्स व प्रिस्क्रिप्शन सहित समस्त Document एक साथ भेजते रहना जारी रखना चाहिए।

मनोरोगों से विभिन्न स्तरों पर होती अन्य हानियाँ व अन्य आशंकाएँ.. प्रत्यक्ष आत्महत्या व अप्रत्यक्ष रूप से आत्मघाती प्रयास, दिनचर्या में बात-बात में व बिना बात के भी निराशापूर्ण रवैया, पारिवारिक मतभेद, दुर्वसन, शिक्षा अधूरी छोड़ना व इसमें पिछड़ना व कार्यस्थल में उत्पादकता में कमी, वैधानिक व वित्तीय समस्याएँ, निर्धन व बेघरबार होना, रोग-प्रतिरोधक तन्त्र (Immunity System) कमज़ोर पड़ना, हृदयरोग इत्यादि।

मानसिक बीमारी से बचाव –

*. लक्षण दिखते ही सतर्क हो जायें एवं परिवार-समाज की प्रतिक्रियाओं की चिन्ता छोड़ मनोरोग चिकित्सक, मनोविज्ञानी आदि से मिलें।

*. यदि किसी बीमारी की औषधियाँ सेवन करने के दौरान व कुछ व काफ़ी समय बाद मानसिक दशा में कोई परिवर्तन लगे तो सम्बन्धित उस चिकित्सक व मनोचिकित्सक दोनों से एकसाथ सम्पर्क साधें

*. परिचित में यदि मनोरोग (Mental Problem) के लक्षण दिखें, वह उदास-उदास-सा व स्वयं के प्रति असामान्य रूप से बहुत लापरवाह दिखे तो उससे व उसके निकट सम्बन्धियों से चर्चा करें.

*. किसी भी प्रकार के रोग में मन से व फ़ार्मासिस्ट (Pharmacist) के कहने से कोई दवाई न लें, सीधे Doctor से मिलें, इनसे अन्य हानियों के अतिरिक्त ड्रग-एडिक्शन (Drug Addiction) की भी आशंका बलवती हो जाती है, इसके साथ व अलग से किसी मनोरोग को आमन्त्रण भी सम्भव।

*. बागवानी, सायंकाल, रस्सी कूदने जैसी नैसर्गिक गतिविधियों में शारीरिक सक्रियता बनाये रखें।

*. पूजा-पाठ, धार्मिक व आध्यात्मिक कार्यों व सोच में रुचि लैवें।

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