होंठों की समस्याएँ कारण निवारण व घरेलु उपाय

होंठों की समस्याएँ कारण निवारण व घरेलु उपाय Lips Causes Treatment Home Remedies In Hindi

Lips Causes Treatment Home Remedies In Hindi

ओष्ठों (होठों) को देखकर शरीर के भीतर रक्त के कुछ लक्षणों के संकेत समझे जा सकते हैं। ग़ुलाबी होंठों में लिप्स्टिक भी लगाने की जरूरत नहीं लगती परन्तु ग़ुलाबी व भरे-हुए-से मोटे होंठ भी अस्वस्थ हो सकते हैं एवं स्वस्थ होंठ गुलाबी अथवा भरे-हुए-से हों ऐसा आवश्यक नहीं। होंठों से जुड़ी अनेक समस्याएँ हो सकती हैं जिनमें जलन, सूजन, फटन, सूखना, दर्द, दरारें व रक्तस्राव मुख्य हैं। प्रायः ये सब लक्षण किसी भी एक कारण से भी हो सकते हैं, इसका एक प्रमुख कारण यह है कि होंठ में तेल -ग्रंथियाँ नहीं होतीं।

होंठों की त्वचा को खींचने-खुरचने अथवा कुछ भी लगा लेने से उनमें संक्रमण हो सकता है, घाव गहरा हो सकता है जिसे भरने में देरी भी सम्भव। विशेष तौर पर दरारों में अथवा रासायनिक पदार्थों से संवेदनशील हो चुकी अथवा रगड़ी-खुरची त्वचा में जीवाणु सरलता से प्रवेश कर सकते हैं। इस प्रकार ओष्ठ-शोथ (केईलाइटिस) सम्भव जिसमें होंठों में तात्कालिक अथवा दीर्घकालिक सूजन हो सकती है जिसमें चिकित्सात्मक उपचार जरुरी हो जायेगा।

Lips Causes Treatment Home Remedies In Hindi

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होंठों की समस्याओं के कारण व निवारण

1. रासायनिक लिप्स्टिक्स का प्रयोग न करें – यदि करना ही हो तो हर्बल लिप्स्टिक्स का प्रयोग करें। इनसे त्वचा में न तो इरिटेशन उत्पन्न होगा, न ही होंठों की त्वचा में सूखापन आयेगा। वैसे स्पबेरी जूस अथवा अनार के रस को होंठों पर सीधे लगा लेने से भी कुछ समय तक उसी रंग में होंठों की त्वचा रंगी-सी लगती है, कुछ ग़ुलाबी-सा रंग।

2. शरीर में Vitamin-E की कमी से भी सूखापन व रूखी त्वचा सम्भव इसलिये गेहूँ के जवारों, सूर्यमुखी बीजों, कुसुम, सोयाबीन, बादाम के तैलों को खाने व लगाने में प्रयोग करें। मूँगफली व इसके तैल, पालक, कद्दू व शिमला मिर्च का सेवन किया करें।

3. होंठों की बात हो अथवा समूचे शरीर की त्वचा उसके सूखने का एक प्रमुख कारण पर्याप्त पानी न पीना हो सकता है। अतः स्वच्छ जल व अन्य नैसर्गिक पेयों की मात्रा बढ़ायें।

4. होंठों में पपड़ी बन रही हो तो उसे जबरदस्ती खींचकर न निकालें, नारियल-तैल लगायें एवं उसे स्वतः उतरने दें।

5. यदि होंठों में लगानी वाली किसी सामग्री में कपूर हो तो उसकी मात्रा होंठों के सन्दर्भ में कम रखें, अन्यथा यहाँ की पतली त्वचा में सूखापन आ सकता है तथा एक्स्पायर्ड प्रोडक्ट्स का प्रयोग न करें।

6. प्रदूषित वायु व धुआँ – ऐसे परिवेश से दूर रहें तथा यात्रादि में मुख पर कोई कपड़ा बाँधे रहें तथा पेड़-पौधे ख़ूब लगायें, यदि स्थान कम हो हो गमलों में बेलाओं को लगाकर पूरे घर को लताकुँज बनाया जा सकता है, विशेषतया कौरव-पाण्डव बेल (राखीफूल अथवा कृष्णकमल) व विधारा लगाकर।

7. धूम्रपान – विभिन्न रसायनों व धूम्रपान से त्वचा समय से पहले बूढ़ी हो जाती है, उसमें गहरा रंग व झुर्रियों का आना लगभग तय-सा हो जाता है। धूम्रपान छोड़ें। यह आवश्यक नहीं कि फ़ीके रंग के होंठ वाला हर व्यक्ति धूम्रपान करता ही होगा परन्तु धूम्रपान होंठों को बदरंग करने में मुख्य भूमिका निभाता है, ऐसे लोगों के होंठ काले-साँवले अथवा गहरे अथवा भूरे निशान युक्त लग सकते हैं। कोई धूम्रपान कर रहा हो तो उसके धुएँ में रहने अर्थात् आपके द्वारा सेकण्ड स्मोक करने से भी होंठों के रंग पर असर पड़ सकता है।

8. हर समय होंठों पर कुछ न कुछ लगाये रखने अथवा सोने से पहले होंठों को ठीक से साफ न करने से भी होंठों का प्राकृतिक रंग उड़ने लगता है। त्वचा अपने हिस्से की आक्सीजन की कुछ मात्रा स्वतन्त्र रूप से स्वयं भी वायु से सीधे लेती है तथा नैसर्गिक सूर्य प्रकाश भी त्वचा के लिये आवश्यक है। अतः त्वचा में बिना कुछ लगाये कुछ समय उसे खुली धूप व वायु में उन्मुक्त रहने दिया करें।

9. सूखे होंठों पर रासायनिक लेप -कभी लिप्स्टिक तो कभी अन्य प्रकार से कोई न कोई रसायन होंठों पर सीधे लगा लेने से भी होंठ की नैसर्गिक चमक नष्ट होती है, यदि कुछ लगाना ही हो तो नारियल-तैल अथवा बादाम-तैल होंठों पर लगाने के बाद ऊपर से उसे लगायें।

10. नाग से होड़ – जीभ बाहर निकालकर लपलपाते हुए होंठों को बारम्बार चाटने से त्वचा शीघ्र सूखने लगती है, वैसे भी लार तेजी से सूखती है। जीभ लगाने पर तात्कालिक नमी अनुभव होने के बाद सूखापन और बढ़ अवश्य जाता है। विशेष रूप से स्वादिष्ट लिपबाम का प्रयोग न करें अथवा प्रयोग करके तुरंत धो लें तथा चाय-काफ़ी पीने अथवा कोई स्वादिष्ट वस्तु खाने के बाद होंठों पर जीभ लगाने की गुंजाइश हो तो होंठों को पानी से धो लें।

11. धूप में प्राय: नारियल तेलअथवा ग्वारपाठा के तरल के रूप में नैसर्गिक सनस्क्रीन लगाकर निकलें।

12. सतर्क रहें – हो सकता है कि कुछ परफ्यूम्स, रंजक (डाएज़) अथवा रासायनिक फ्ऱेगरेन्स आपके लिये विशेष रूप से एलर्जिक हों तो इनसे विशेष दूरी बरतें, वैसे कई कोस्मेटिक्स इस वर्ग में सम्मिलित हो सकते हैं जिनमें मिला कोई अवयव आपके होंठों की मुस्कान छीन सकता है।

13. अन्य उपाय –

*. नारियल के तैल में अनार के कुछ बीज – अनार के एण्टिआक्सिडेण्ट्स एवं नारियल-तेल से होंठों को अच्छे वसा प्राप्त हो जाते हैं क्योंकि यहाँ त्वचा अत्यधिक पतली होने से कुछ भी अवशोषित सरलता से कर लेती है।

*. किसा हुआ थोड़ा-सा चुकन्दर घीं में मिलाकर – चुकन्दर में पाये जाने वाले वर्णक (पिग्मेण्ट्स) बेटानिन व वुल्गाज़ेन्थिन गहरे रंग के होंठों में हल्कापन लाने में व कुछ समय तक हल्का-ग़ुलाबीपन दिखाने में सहायक हैं। घीं में ऐसे कई पोषक वसीय अम्ल होते हैं जो मास्च्युराइज़र के जैसा कार्य भी करते हैं।

*. कोकोआ बटर में दालचीनी चूर्ण मिलाकर – दालचीनी के एण्टिआक्सिडेण्ट से होंठ नैसर्गिक रूप से फूले हुए-से लग सकते हैं क्योंकि इससे होंठों में झुनझुनी-सी उत्पन्न हो जाती है। कोकोआ बटर से त्वचा में नमी आती है एवं पोषण भी मिलता है तथा इससे दालचीनी के प्रभाव से आने वाला झुनझुनापन भी घटता है।

*. नारियल तैल में पूर्णतया पका स्ट्राबेरी – स्ट्राबेरी को कुचलकर तैयार इस लिपबाम में स्ट्राबेरी के कारण विटामिन-सी होता है जो विशेष रूप से ठण्ड के मौसम में होंठ की मृत कोशिकाओं को हटाने में सहायक हो सकता है, ठण्ड में लोगों को अपने होंठ उधड़े अथवा दरारे लगने लगते हैं। नारियल-तैल से होंठों में उस वसा की वापसी होगी जो मृत कोशिकाओं के साथ निकल गया था।

*. स्ट्राबेरी विटामिन-सी व एण्टिआक्सिडेण्ट्स से सम्पन्न होता है जिसे जैतून के तैल में मिलाकर लगाया जा सकता है।

*. हल्की अँगुली से होंठों पर बादाम-तैल लगाया करें।

*. षिया बटर लगाने से प्रदूषण व माहौल की गर्मी से नैसर्गिक सुरक्षा मिल जाती है।

*. ग्वारपाठा से मास्च्युराइज़ करें – बाज़ार से लाये गये एलोवेरा जेल अथवा ताज़ी पत्ती का एक भाग टुकड़े-टुकड़े करके होंठों पर मलें तो शान्तिदायी व घाव भरने वाला प्रभाव आयेगा एवं होंठ आकर्षक दिखेंगे।

*. गुलाब-जल की कुछ बूँदों व एक-दो बूँद नींबू-रस को पानी में मिलाकर इस मिश्रण में रूई को भिगोकर होंठों पर हल्की अँगुली से मालिश करें जिससे होंठ हल्के रंग के दिखने लगेंगे व मृत त्वचा हटाने में भी यह सहायक है किन्तु ध्यान रहे कि इस समय होंठ फटे अथवा दरार युक्त अथवा सूखे हुऐ से न हों, अन्यथा जलन सहित अन्य बिगड़ी स्थितियाँ सम्भव।

*. पुदीना तैल को बादाम-तेल अथवा नारियलतेल में मिलाने से होंठों की त्वचा में ठण्डक भी अनुभव हो सकती है एवं सूखापन घटता है। नारियल-तैल में दर्द दूर करने में वाले तत्त्व भी होते हैं।

*. नारियल तेल में विसंक्रमणकारी (डिसइन्फ़ेक्टिंग) व सूक्ष्मजीवरोधी (एण्टिमाइक्रोबियल) गुणधर्म भी होते हैं जिनसे यह तैल होंठों को रोगाणुमुक्त रखता है एवं फटी त्वचा से संक्रमण को भीतर आने से रोकता है। नारियल-तेल में सूजन कम करने वाले घटक भी होते हैं। झुर्रियाँ कम करने में भी नारियल-तैल का प्रयोग किया जाता रहा है। नारियल-तैल लगाते से ही होंठों सहित आसपास की त्वचा भी दमकने लगती है। नारियल-तैल में जैतून के तैल को अथवा शिया बटर को भी मिलाकर सोया जा सकता है, सुबह स्नान के दौरान होंठ धुलकर साफ व उजले प्रतीत होंगे।

*. विटामिन-ई लिप बाम – विटामिन-ई के 3 Capsules, दो चम्मच नारियल-तेल , एक चम्मच मसला कोकोआ बटर, एक चम्मच ग्रीन टी पत्तियाँ (कुचली हुईं) के मिश्रण में चाहें तो Essential Oil (गुलाब, लैवेण्डर अथवा वनीला) की तीन बूँदें भी मिला सकते हैं। बहुत कम ताप पर छोटी-सी कटोरी अथवा मिट्टी के कटोरे में नारियल-तैल की कुछ मात्रा पिघलायें, इसमें ग्रीन टी मिलाकर ठीक से मिला लें। अब एक तवे पर कोकोआ बटर पिघलायें एवं इसे नारियल-तैल में मिला दें।

कैप्सूल को पंक्चर करते हुए इस मिश्रण में Vitamin-e एवं Essential Oil मिलाकर ठीक से मिला लें। Vitamin-e में रिजनरेशन कराने की शक्ति होती है, अर्थात् यह फटे-दरारयुक्त ओष्ठों को ठीक करता है व उनमें कोमलता लाता है। ग्रीन टी एण्टिआक्सिडेण्ट्स में समृद्ध होती है एवं फटे होंठों की लालिमा व जलन को दूर करती है। कोकोआ बटर व नारियल-तैल स्नेहक (ल्युब्रिकेण्ट्स) का कार्य करते हैं।

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