कोलेस्ट्रॉल कम कैसे करे 12 उपाय

कोलेस्टेराल कम कैसे करे 12 उपाय How to Reduce Cholesterol in Hindi

How to Reduce Cholesterol in Hindi

कोलेस्टेराल का नाम सुनते ही लोगों को ख़तरे की घण्टी सुनायी देने लगती है किन्तु इस विषय में बात शुरु करने से पहले यह स्पष्ट कर देना आवष्यक है कि मानव-षरीर में लाभप्रदता व हानिप्रदता के आधार पर दो प्रकार के कोलेस्टेराल होते हैंः लाभप्रद कोलेस्टेराल अर्थात् हाईडेन्सिटी लिपिड एवं हानिप्रद Cholesterol अर्थात् लाडेन्सिटी लिपिड। हमें हानिप्रद कोलेस्टेराल को घटाने व लाभप्रद कोलेस्टेराल को बढ़ाने पर ज़ोर देने की आवश्यकता है।

वास्तव में एलडीएल एवं एचडीएल दोनों ही भिन्न प्रकार के लिपोप्रोटीन्स हैं जिनमें वसा (वसाभ अर्थात् लिपिड) व प्रोटीन का संयोजन होता है। समग्रता में Cholesterol एक मोमसमान, वसा के जैसा पदार्थ होता है जो शरीर की सभी कोशिकाओं में पाया जाता है तथा यकृत द्वारा इसका निर्माण किया जाता है एवं दुग्धोत्पादों इत्यादि से यह बाहर से शरीर में प्रवेश कर जाता है।

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लाडेन्सिटी लिपिड (एलडीएल) हानिप्रद कोलेस्टेराल क्यों ?

लाडेन्सिटी लिपिड के कारण हृदयरोग व हृदयाघात् का जोख़िम बढ़ता है क्योंकि इससे धमनियों में कालेस्टेराल का जमाव होने लगता है। एलडीएल की अधिक मात्रा होने का तात्पर्य यही है कि रक्त में इसकी मात्रा अधिक है। अन्य कारकों के साथ जुड़कर यह अतिरेक लाडेन्सिटी लिपिड प्लेक का निर्माण कर सकता है जो कि धमनियों में जमा होते रह सकता है, इससे धमनी-काठिन्य (एथेरोस्क्लेरासिस) की स्थिति आती है।

हृदय की धमनियों में प्लेक-निर्माण होने लगे तो कोरोनरी धमनीरोग हो जाता है जिसमें धमनियाँ कठोर व संकीर्ण हो जाती हैं जिनमें से फिर हृदय की ओर रक्त जाने की गति या तो मंद हो जाती है अथवा प्रवाह रुक भी सकता है। चूँकि रक्त के माध्यम से ही हृदय की ओर आक्सीजन पहुँचती है अतः इस स्थिति में हृदय को पर्याप्त आक्सीजन नहीं मिल पाने की समस्या उत्पन्न हो सकती है। इससे एंजाइना (चेस्ट-पैन) हो सकता है अथवा यदि रक्तप्रवाह पूर्णतया अवरुद्ध हुआ तो हृदयाघात् आ सकता है।

लाडेन्सिटी लिपिड को कम कैसे करें ?

1. माँसाहार व मद्यपान त्यागें।

2. ‘अच्छा’ कोलॅस्टेराल बढ़ायें क्योंकि यह ‘बुरे’ कोलॅस्टेराल को शरीर के अन्य भागों से यकृत में ले जाता है, फिर यकृत इस एलडीएल को शरीर से निकाल देता है। हाई डेन्सिटी लिपिड वास्तव में रक्त-वाहिकाओं की आन्तरिक भित्तियों या दीवारों (एण्डोथॅलियम) के लिये सुरक्षा-कर्मचारी-सा कार्य करता है। धमनी-काठिन्य (एथेरोस्क्लेरोसिस) की प्रक्रिया में आन्तरिक भित्तियों को होने वाली क्षति एक पहला कदम होती है जिससे हृदयाघात् व स्ट्रोक्स आते हैं। एचडीएल एक प्रकार से भित्तियों को साफ रखता है जिससे ये स्वस्थ रहती हैं।

3. संतृप्त वसा (सेचुरेटेड फ़ैट्स) से दूर रहें – अण्डादि माँसाहार में सेचुरेटेट फ़ैट्स अत्यधिक होते हैं जिससे इनका सेवन हमेषा के लिये बन्द करें परन्तु दुग्धोत्पादों का सेवन भी घटाना तो होगा। इस प्रकार शरीर में हानिप्रद कोलॅस्टेराॅल के स्तर को कम करने में सहायता होगी।

4. ट्रान्स फ़ैट्स से दूरी – किसी सामग्री पर ‘पार्षियली हायड्रोजिनेटेड वेजिटेबल आइल’ अथवा ट्रांस फ़ैट लिखा देखें तो उसे ख़रीदने से यथासम्भव बचने का प्रयास करें। इनका प्रयोग स्टोर-बाट कुकीज़, क्रेकर्स, केक सहित नकली मक्खन में किया जाता रहा है। ट्रान्स फ़ैट्स से कोलॅस्टेराल स्तर बढ़-बढ़ जाते हैं।

5. ओमेगा-3 वसीय अम्लों से समृद्ध आहार सेवन करें – ओमेगा-3 वसीय अम्लों से एलडीएल स्तर पर प्रभाव तो नहीं पड़ता परन्तु इनसे अन्य हृदय-स्वास्थ्य अनुकूल प्रभाव पड़ते हैं जिनमें उच्चरक्तचाप घटकर सामान्य होना सम्मिलित है। अलसी व अखरोट सहित सफेद सरसों (केनोला) तैल एवं सोयाबीन के तैल में ओमेगा-3 वसीय अम्ल मिल जाते हैं। चिया सीड्स भी ओमेगा-3 वसीय अम्लों का स्रोत है।

6. विलयशील (घुलनशील) रेशे अधिक खायें – विलयशील रेशो का सेवन बढ़ाने से हानिप्रद कोलॅस्टेराल रुधिरधारा में अवशोषित कम हो पाता है। जई, मसूर, सेम, सेब व नाशपाती में विलयशील खाद्य रेशे पाये जाते हैं।

7. व्हे प्रोटीन – मट्ठा में काफी पाया जाने वाला यह प्रोटीन समस्त दुग्धोत्पादों में मिलता है इसमें एलडीएल व रक्तचाप दोनों को घटाने के लक्षण दिखे हैं।

8. ट्राईग्लिसराइड्स घटायें – यह मानव शरीर में एक प्रकार का वसा है जो आहार से अतिरिक्त ऊर्जा को संचित करता है। अधिक ट्राईग्लिसराइड्स के साथ यदि एलडीएल के बढ़े हुए स्तर का संगम हो जाये तो इन दोनों स्थितियों का एकसाथ होना अपने आप में अनेक समस्याओं को न्यौता देने में सक्षम है- धमनी की भित्तियों में वसीय जमाव हो जाता है जिससे हृदयाघात् व स्ट्रोक का जोख़िम बढ़ता है।

ट्राईग्लिसराइड्स का स्तर घटाना हो तो डिब्बाबंद व पैकेज्ड फ़ूड्स से यथासम्भव दूरी बरतें तथा नियासिन (विटामिन-बी3) के लिये खमीर, दूध, हरी पत्तेदार सब्जियाँ, फलियाँ, धान्य का सेवन अधिक करें, यह विटामिन शरीर में आहार को ऊर्जा में परिणत करता है। यह तन्त्रिका व पाचन तन्त्र सहित स्वस्थ त्वचा के भी लिये महत्त्वपूर्ण है। इस विटामिन के सेवन से ट्राईग्लिसराइड्स व एलडीएल के स्तर घटाने एवं एचडीएल बढ़ाने में सहायता होती है।

9. शारीरिक सक्रियता नैसर्गिक रूप से बढ़ायें – जिमिंग व बाडीबिल्डिंग की माया में न पड़ते हुए शरीर को प्राकृतिक रूप से सहज सक्रिय बनायें, साईकल चलायें, रस्सी कूदें, मोहल्ले के चक्कर लगा आयें, नियन्त्रणीय गति से दौड़ें, सीढ़ियाँ चढ़ें-उतरें, अपने कपड़े-बर्तन स्वयं धोयें, हाथों से। मोटापा, तोंद की समस्या हो तो शारीरिक गतिविधियाँ बढ़ाना और अधिक महत्त्वपूर्ण हो जाता है, घर-मोहल्ले में बागवानी करें, उछल-कूद करते रहें, यह सब सभी के लिये आवष्यक है।

10. धूम्रपान बन्द करें – धूम्रपान बन्द करने से एचडीएल स्तर को बढ़ावा मिल सकता है जो कि अपने आप में ही एलडीएल का तोड़ (एण्टिडोट) है।

11. मन से मेडिसिन न लें – स्टेरायड्स, रक्तचाप की कुछ दवाइयों सहित HIV और एड्स की दवाइयों तथा दीर्घकालिक वृक्करोग, मधुमेह इत्यादि चिकित्सात्मक दशाओं से भी एलडीएल बढ़ सकता है, अतः अपने मन से किसी निष्कर्ष पर पहुँचने से बचते हुए विशेषज्ञीय देखरेख में समुचित उपचार करायें।

12. एलडीएल-विरोधी मसाले – लहसुन, काली मिर्च, अदरख, धनिया व दालचीनी स्वाद बढ़ाने के साथ ही हानिप्रद कोलॅस्टेराल का स्तर घटाने में भी उपयोगी सिद्ध हुए हैं। चाय व खाने में इनकी मात्राएँ कुछ अधिक रखें।

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तो ये था हमारा आज का आर्टिकल कोलेस्टेराल कम कैसे करे 12 उपाय, How to Reduce Cholesterol in Hindi मेरे प्रिये पाठको मेरा ये आर्टिकल आपको कैसा लगा हमें Comment Box में आपके जवाब का इंतज़ार करेंगे। तब तक आपके लिए ऐसे ही रोचक और अच्छी सेहत से जुड़े ऐसे ही आर्टिकल लिखते रहेंगे। .. धन्यवाद

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