गले की खराश दूर करने के 17 उपाय

गले की खराश दूर करने के 17 उपाय How To Get Rid of Sore Throat Infection In Hindi

How To Get Rid of Sore Throat Infection In Hindi

मौसमी परिवर्तनों या कुछ गर्म के बाद ठण्डा खा-पी लेने अथवा तबियत ख़राब होने की स्थिति में गले में खराश (sore throat) जैसी समस्याएँ आ जाया करती हैं, यदि ऐसी स्थिति अभी-अभी आयी हो या गम्भीर स्थिति न हो तो निम्नांकित घरेलु उपाय आज़मायें.

एकल प्रयोग –

1. मेथी बीज – सब्जी में इनकी मात्रा बढ़ायें तथा इन्हें रात को गलाकर सुबह उबालकर सब्जी बनाकर भी खाया जा सकता है।

2. अदरख – खाने-पीने में इसकी मात्रा बढ़ायें। सौंठ के भी रूप में इसका प्रयोग करें।

3. लहसुन – इन्हें सब्जी-दाल में बढ़ायें तथा चाहें तो मसाले के साथ इसे पीसकर भी प्रयोग कर सकते हैं ताकि कोई लहसुन (Garlic) के टुकड़े निकालकर अलग न कर पाये।

दाल-सब्जी बनाते समय तैल में जीरा डालने से भी पहले अथवा जीरा डालने के बाद लहसुन की कलियों को तल लें जिससे ये अधिक नर्म व बहुत स्वादिष्ट हो जायेंगी जिन्हें बिना कुछ किये सीधे खाया जा सकता है।

4. दालचीनी – सब्जी-मसाले के डिब्बों में एक डिब्बा इसका भी रखें।

5. मुलहठी – साबुत मुलहठी को दुचलकर छोटा-सा भाग मुख में रखकर धीरे-धीरे चबाते रहें जब तक कि वह भीतर पूरी तरह घुलकर पेट में न चला जाये। साबुत मुलहठी न मिलने पर इसका चूर्ण भी ख़रीदा जा सकता है।

गले की खराश दूर करने के 17 उपाय,How To Get Rid of Sore Throat Infection In Hindi,gale ki kharash ko kaise door kare, sore throat tips in hindi
Sore Throat

How To Get Rid of Sore Throat Infection In Hindi

6. हल्दी – गले, पाचन-तन्त्र सहित समूचे शरीर को हानिप्रद जीवाणुओं इत्यादि से दूर रखने वाली हल्दी की मात्रा खान-पान में बढ़ायें एवं दूध में हल्दी मिलाकर पीयें।

7. अलसी – गला ठीक होने तक कुछ मात्रा में भुनी अलसी (जो गायत्री शक्तिपीठ की व अन्य दुकानों में उपलब्ध हैं) खा सकते हैं अथवा घर पर उसे भूँज अथवा पीस सकते हैं। ध्यान रहे कि इसकी मात्रा कम रखनी है एवं इस दौरान पानी अधिक पीना है।

8. काली मिर्च – बैंगन का भुर्ता हो अथवा अन्य कोई सब्जी अथवा दाल उसमें काली मिर्च की मात्रा बढ़ायें।

9. तुलसी – विभिन्न प्रकार की तुलसियों की पत्तियों एवं सूखी पुष्प-मंजरियों व टहनियों को काढ़े अथवा चाय में मिलाकर पीयें।

10. लौंग-तुलसी – इसकी पत्तियों में लौंग व तुलसी दोनों का स्वाद रहता है। इसके पत्ते चबाना गले व सर्दी-खाँसी-ज़ुकाम तक में अच्छा रहता है।
कुछ संयोजनः-

11. अदरख गुड़ – किसे अदरख को गुड़ के साथ मद्दी आँच में भून ले व थोड़ा गर्म एवं यथासम्भव नर्म ही खायें एवं फिर पानी नहीं पीना है।

12. अदरख गुड़ घीं हल्दी – रात को सोने से पहले तवे पर देसी गाय का घीं डालें, फिर अदरख के बारीक टुकड़ों अथवा कीसे हुए अदरख को रखकर चम्मच से जल्दी-जल्दी चलायें, अन्त में कुचलकर रखा हुआ गुड़ डालने के कुछ सेकण्ड्स बाद हल्दी डालें एवं नर्म रूप में गुनगुना खाकर सो जायें।

13. अदरख लहसुन गुड़ – तवे अथवा अन्य पात्र में साबुत अथवा कीसे लहसुन एवं अदरख के छोटे-छोटे टुकड़ों अथवा कीसे गये अदरख को देसी घीं में भूँजते हुए गुड़ मिला लें एवं कुछ गर्म-गर्म ही खायें।

14. सामान्य चाय में डाले – अदरख (व सौंठ), लौंग, कालीमिर्च, हल्दी, मुलहठी, दालचीनी में से कुछ-कुछ अथवा सब को रोज़ बदल-बदलकर अथवा एक साथ विभिन्न अनुपातों में चाय में डालें।

तुलसी व लौंग-तुलसी भी मिला लिया करें। जो भी चाय पत्ती ख़रीदें उसमे हल्दी, अदरख इत्यादि मिले हैं या नहीं अवष्य देख लें, यदि मिले हों तो अच्छा है किन्तु फिर भी अलग से भी इन हर्बल उत्पादों को मिलाना है।

आजकल अलग से कुछ औषधीय मिश्रण मिल जाते हैं, जैसे कि पतंजलि दिव्य पेय (Patanjali Pey), घर में अपने हाथ से लौंग, सौंठ इत्यादि और डालना भी उपयोगी है।

कॉफ़ी में भी दालचीनी इत्यादि मिलाकर उसे गले के लिये सहायक बनाया जा सकता है व स्वाद भी बढ़ाया जा सकता है; यदि एक बार में सटीक स्वाद न आये तो निराश न होते हुए पुनः प्रयास करें, धीरे-धीरे स्वाद में सुधार आता जायेगा।

15. सामान्य सब्जी-दालों में – मेथी-बीज, अदरख (व सौंठ), लहसुन, दालचीनी, कालीमिर्च व हल्दी की मात्रा बढ़ायें। हींग, लहसुन, अदरख इत्यादि के नाम पर इस तरह मुँह न बनायें जैसे छिपकली खाने को बोल दी हो.

ध्यान रहे कि ये औषधियाँ सामान्य मसालों के भी रूप में बुढ़ापा दूर रखने, बालों व त्वचा में चमक लाने वाले एवं ख़ून साफ़ करने वाले Anti – Oxidants से भरपूर रहती हैं।

16. काढ़ा – तुलसी, कालीमिर्च, सौंठ, हल्दी इत्यादि को मिलाकर साथ उबालते हुए काढ़ा बना सकते हैं, स्वाद के लिये चाहें तो गुड़ मिला सकते हैं ताकि काढ़ा आसानी से पिला सके।

17. हर्बल भाप – आधे-एक लीटर पानी में नीलगिरि, पुदीना के पत्ते मिलाकर उबालते हुए उबाल के आखिर में ज़रा-सा कपूर डालकर अपने सिर को टावेल से ढँककर मुख के पास गिलास अथवा गंजी लाकर भाप-सेवन करें तो त्वचा, गले व श्वसन-तन्त्र के लिये बढ़िया रहेगा तथा विशेष रूप से अस्थमा व मुँहासों से राहत पाने में भी।

गले की खराश में प्रमुख सावधानियाँ –

1. कोई भी उपाय अपनाते समय अथवा वैसे भी दिन में अनेक बार गुनगुने खारे पानी से गरारे अवश्य करें तथा अन्त में गिलास के खारे पानी से कुल्ला भी कर ले। हल्दी व सेंधा नमक मिलाकर गरारे व कुल्ले करें तो बेहतर होगा। साथ में अजवायन को भी उबाल सकते हैं।

2. सर्दी खाँसी, गले में खराश जैसी कोई भी स्थिति तो संक्रामक लग सकती है उस स्थिति में भीड़ से विशेष दूरी बरतें तथा छींकते-खाँसते समय मुख व नाक पर रुमाल तो स्वस्थ स्थिति में भी रखना ही चाहिए।

3. माँसाहार, गुटखा, धूम्रपान, जरदा-पान व सुपारी तो वैसे भी बिल्कुल सेवन करने योग्य कभी नहीं होते परन्तु गले की समस्या के सन्दर्भ में खटाई व रूखे आहार का सेवन कुछ कम रखने का प्रयास करें।

4. दालचीनी व काली मिर्च इत्यादि पिसी हुई ख़रीदने के बजाय या तो हर बार खरी ख़रीदकर घर में पीसें अथवा चाय अथवा सब्जी में डालने के लिये घर में सब साबुत मिलाकर पीसकर रखें क्योंकि बाज़ार से पिसे हुए लाने पर पता नहीं चलता कि कितने महीनों के पीसे रखे हुए हों.

ध्यान रहे कि पीसने के बाद उनका औषधीय व पोषणात्मक मान तेजी से घटता जाता है। चाहें तो इन सबके छोटे टुकड़े एक डिब्बे में भर सकते हैं एवं हर बार प्रयोग के लिये तुरंत ही मिश्रित रूप में सन्सी अथवा छोटे खल-बट्टे में पीस-दुचल सकते हैं।

5. गले में चोट लगी हो अथवा स्थिति पुरानी हो एवं गम्भीर हो तो चिकित्सक से मिलें, आवश्यकतानुसार नाक-कान-गला रोग एक्सपर्ट के पास जाना पड़ सकता है.

Read Also These Articles –

तो ये थी हमारी पोस्ट – गले की खराश दूर करने के 17 उपाय, How To Get Rid of Sore Throat Infection In Hindi,Hernia kya hai,Gale Ki Kharash Kaise Door Kare. आशा करते हैं की आपको पोस्ट पसंद आई होगी और Gale Ki Kharash ka upchar की पूरी जानकारी आपको मिल गयी होगी. Thanks For Giving Your Valueble Time.

इस पोस्ट को Like और Share करना बिलकुल मत भूलिए, कुछ भी पूछना चाहते हैं तो नीचे Comment Box में जाकर Comment करें.

Add a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *