वर्षा ऋतु में स्वास्थ्य का ध्यान कैसे रखें How To Care Health On Rain Season In Hindi

वर्षा ऋतु में स्वास्थ्य का ध्यान कैसे रखें How To Care Health On Rain Season In Hindi

How To Care Health On Rain Season In Hindi

बरसात का मौसम आते ही वायरल बुखार या सर्दी-खाँसी अथवा ज़ुकाम से जुड़ी समस्याएँ काफ़ी दिखने लगती हैं। आर्द्रता व पानी की अधिकता से वातावरण ही ऐसा बन जाता है जो सूक्ष्मजीवों के लिये अनुकूल एवं मानव के श्वसन व पाचन तन्त्रों के प्रतिकूल हो जाता है.

सामान्य खाना पचाने तक में समय लगने लगता है क्योंकि पेट की पाचक अग्नि बरसात में मंदी रहती है। निम्नांकित सावधानियों विशिष्ट रूप से वर्षा ऋतु के दौरान ही नहीं बल्कि समग्रता में सभी ऋतुओं में बरतीं जानी चाहिए क्योंकि बीमारियाँ मौसम देखकर आक्रमण नहीं किया करतीं.

How To Care Health On Rain Season In Hindi

How To Care Health On Rain Season In HindiCare Health On Rain Season

1. पर्सनल हायजीन बनाये रखें

निज साफ़-सफ़ाई का विशेष ध्यान रखें, कई विषाणु व जीवाणु वर्षा के मौसम में तेजी से पनपने लगते हैं, जैसे कि नाखून न चबायें, वैसे तो हाथ-पैरों के नाखूनों को हफ़्ते-पखवाड़े में अवश्य काटते रहना चाहिए परन्तु उन्हें चबाना तो कभी नहीं चाहिए, अन्यथा नाममात्र के बढ़े दिख रहे नाखूनों में भी रोगप्रद सूक्ष्मजीव घुसे हो सकते हैं जिन्हें आपके मुख व पेटरूपी स्वादिष्ट आवास-स्थान मिल जाने पर ख़ूब फलने-फूलने का अवसर मिल सकता है।

2. घर की स्वच्छता

बरसात के समय घर के आँगन में नीचे अथवा मुण्डेर पर रखे पाइपों इत्यादि में पानी भर सकता है। थमा हुआ पानी तो मच्छरों का प्रजनन-केन्द्र बन सकता है। मेज-अल्मारियों की धूलखेन को समय पर या आवश्यकतानुसार साफ़ करते रहें, अन्यथा ये एलर्जेन्स बनकर श्वसन-पथ को संक्रमित कर सकते हैं क्योंकि बाहर इतनी नमी हो तो घर जैसी बन्द जगहों के अन्दर मनुष्य का श्वसन-तन्त्र गंदगी से शीघ्र प्रभावित हो जाता है।

ध्यान रखें कि पक्षियों-गिलहरियों इत्यादि के लिये भोजन-पान की व्यवस्था अनिवार्य रूप से करें परन्तु उनके स्वास्थ्य को बनाये रखने एवं मच्छरों को दूर रखने के लिये सकोरों-बर्तनों को सप्ताह में अनेक बार से धोते रहें।

3. साफ़ व सूखे कपड़े व जूते-मौजे पहनें

गीले अथवा अस्वच्छ कपड़ों व मौजों-जूतों में कई सूक्ष्मजीव घर बना सकते हैं। गीले हो जाने पर साफ पानी से नहायें व कपड़े धोयें, बारिश में जान-बूझकर नहायें हों अथवा थोड़े-बहुत गीले हो गये हों तो ध्यान रहे कि वायु में प्रदूषक तत्त्व घूम रहे होते हैं एवं त्वचा से भी शरीर के उत्सर्जी पदार्थ रिसते हुए कपड़ों में अपने आप लग ही जाते हैं, इसलिये ‘कपड़े ज़रा-से ही तो गीले हुए हैं’ सोचकर आलस्य न करें।

घर पर आकर सभी कपड़े धोयें एवं स्नान करें। गीले कपड़े व बाल फ़्लु लाने वाले विषाणुओं को आकर्षित कर सकते हैं। कपड़ों को धोते समय आख़िरी धोवन में डिटौल की कुछ बूँदें अथवा नीम की मसली पत्तियाँ डाल सकते हैं।

कपड़ों को उलटकर (भीतर वाला भाग बाहर व बाहर वाला भाग भीतर करके) तेज धूप में इस प्रकार सुखायें कि कपड़े की पूरी सतह पर धूप पड़े तथा यदि किसी दिन पर्याप्त धूप न निकली हो तो रात को एक खाली कमरे में कुर्सियों पर अथवा अन्यत्र लटकाकर उन्हें हवा में सूखने छोड़ दें।

4. स्विमिंग पूल से दूर

बच्चों को क्या अपने आपको भी स्विमिंग पूल से दूर रखें, ये तो वैसे भी कई संक्रमणों के कारक सिद्ध होते रहते हैं परन्तु वर्षा के मौसम में इनमें उतरने से दस्त, कालेरा, टायफ़ायड व अन्य जलजनित रोग और अधिक आसानी से हो सकते हैं क्योंकि उमस एवं दूर-दूर तक नमी से उन्हें पनपने में सरलता हो जाती है।

5. बाहर खायें सँभलकर

राह चलते फुलकी-कुचले वाले को अथवा अन्य किसी भी खाद्य अथवा पेय वाले को देखकर रास्ते का खाने-पीने को मन मचलने लगता है तो सतर्क रहें। वर्षा ऋतु में खाद्य-विषाक्तता की आशंका बढ़ जाती है, और वैसे ही व्यक्ति व समूह द्वारा हर बार हाथ धोकर एवं साफ-सफ़ाई से सब तैयार किया जाता हो ऐसा भी नहीं है.

अतः सावधान रहें तो संक्रमणों का जोख़िम घटेगा। पानी संदिग्ध लगे तो उसे उबलवाकर पीयें, वैसे तो अपने साथ पेयजल घर से लेकर निकलना चाहिए, मार्ग में मूत्रोत्सर्ग अथवा नेत्र में कुछ चले जाने की स्थिति में आपात्कालीन आवश्यकता कभी भी आन पड़ती है।

6. प्रतिरक्षा-तन्त्र को सुदृढ़ करें

यदि व्यक्ति के शरीर की रोग-प्रतिरोधक प्रणाली कमज़ोर हुई तो कई संक्रामक रोगाणुओं के प्रति शरीर सुग्राही हो जाता है, अर्थात् शीघ्र उनकी चपेट में आ जाता है। सब्जियों, फलों, धान्यों व लहसुन का सेवन अधिक करें तथा विटामिन-सी की अधिकता के लिये नींबू वर्गीय खट्टे फल खायें। हर्बल चाय बनायें।

7. नैसर्गिक शारीरिक सक्रियता

साईकल चलायें, रस्सी कूदें अथवा किसी मंदिर अथवा बरगद के पेड़ की एकानेक परिक्रमाएँ दौड़कर अथवा तेज चाल से चलते हुए नियमित रूप से करें ताकि मन शान्त व तन सक्रिय रहे तथा प्रकृति तो अपने आपमें परमऔषध होती ही है। यह हर व्यक्ति के लिये वर्षभर आवश्यक है ही परन्तु बरसात में पसीना निकालने व शरीर को अधिक सक्रिय रखने के लिये यह और आवश्यक हो जाता है।

8. कृत्रिमता से दूरी बरतें

उपकरणों का प्रयोग वैसे भी हानिप्रद होता ही है किन्तु विशेष रूप से बरसात में भीगकर वातानुकूलित कक्ष में प्रवेश करने से बुखार, खाँसी व ज़ुकाम की आशंका बढ़ जाती है। स्वयं को पूर्णतया साफ़-सुखा कर रखें एवं वातानुकूलित्र बन्द कर दें। इसके अतिरिक्त सदैव पर्याप्त संवातनः प्रापर वेण्टिलेशन वाले माहौल में रहें ताकि नैसर्गिक वायु का आवागमन व प्रकाश का प्रवेश अधिकाधिक होता रहे।

9. दूरी में बहादुरी

भीड़भाड़ व विभिन्न आयाजनों में जाने से बचें जहाँ जाने का कोई औचित्य नहीं होता। बाज़ार, किराना दुकान जैसे जहाँ जाना आवश्यक हो वहाँ भी अधिक आवश्यकता पड़ने पर ही जायें। संक्रमितों की सहायता अवश्य करें किन्तु स्वयं संक्रमित होने पर यहाँ-वहाँ जाने में और सावधानी बरतें तथा Mask को अब जीवन का अनिवार्य घटक बना लें।

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