बच्चों (शिशुओं) में कब्ज़ के लक्षण कारण घरेलू उपचार और परहेज

बच्चों (शिशुओं) में कब्ज़ के लक्षण कारण घरेलू उपचार और परहेज Home Remedies For Constipation In Kids In Hindi

Home Remedies For Constipation In Kids In Hindi

बच्चें का लालन पालन माँ के द्वारा होता है और बच्चे का माँ से ही एक ऐसा रिश्ता होता है के वो बिना बताये ही अपनेबच्चे की हर ज़रूरत, उसकी समस्या और उससे जुड़ी सभी बातों को समझ पाती है। अगर बच्चे को कोई शारीरिक समस्या होती है तो माँ परेशान हो जाती है और अक्सर उसकी समस्या वो जल्दी समझ जाती है।

जब भी बच्चे (शिशु) को कही दर्द होता है तो वो कुछ बोल नहीं पाता मगर रो रो कर वो बता देता है की उसे कुछ परेशानी हो रही है या कहीदर्द हो रहा है। बच्चे को जब भी कही कोई दर्द हो रहा होता है तो वो बहुत ही चिड़चिड़ा हो जाता है और बात बात पररोना शुरू कर देता है।

शिशुओं की सेहत में अक्सर बदलाव तब आते है जब कई बार उनका खान पान सही नहीं होता जैसे उसके माँ के दूधकी सही मात्रा नहीं मिल पाती या फाइबर की कमी के कारण भी उन्हें कब्ज के का सामना करना पड़ता है। तो आपडायपर शिशु को पहना कर उसके पेट का हाल जान सकते है अगर उसका Diaper Clean है या फिर आपको पुरे दिन में Diaper Change करने की ज़रूरत नहीं पड़ रही तो इसका मतलब बच्चे का पेट साफ़ नहीं हो पा रहा।

इसी तरह के और कई कारण है जिस वजह से बच्चे को कब्ज रहती है व पेट में निरंतर दर्द बना रहता है। तो आईये आज हम बच्चेकी सेहत से जुड़े इस खास विषय पर चर्चा करते है और अपने बच्चे के पेट की समस्या का हल ढूंढ़ते है। और आइये जानते है कि शिशुओं में कब्ज के लक्षण, कारण, घरेलू उपचार और परहेज क्या होते है .

Home Remedies For Constipation In Kids In Hindi

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Constipation In Kids

शिशु में कब्ज के क्या लक्षण होते है ?

छोटे बच्चो को अक्सर कब्ज की शिकायत रहती है इसकी पहचान के लिए बहुत से लक्षण होते है जिनके द्वारा कोई भी उनकी इस परेशानी को आसानी से समझ सकते है। ये लक्षण निम्नलिखित है।
*. पुरे दिन में मल का का ना आना।
*. कठोर या बहुत ही सख्त मल आना।
*. जोर लगाकर मल त्यागना।
*. पेट में गैस बनना
*. पेट भारी भारी और सख्त हो जाना।
*. मल करते समय शिशु का चेहरा लाल पड़ जाना।
*. एक सप्ताह में केवल 3 या 4 बार ही मल त्यागना।
*. मल त्यागते वक़्त बच्चे का रोना और दर्द महसूस करना।
*. सर में गैस बन जाना व सर में दर्द होना भी कब्ज का लक्षण है।
*. कभी कभी शिशु को पैर में भी दर्द होता है जिस वजह से वो निरंतर रोता है।

शिशु में कब्ज के क्या कारण है ?

यहाँ पर ऐसे कई कारण है जिनकी वजह से आपके शिशु को कब्ज हो सकती है जैसे :
1. ऊपर का दूध (formula milk) : यदि कोई महिला अपने बच्चे को ऊपर का दूध पीला रही है तो कई बार बच्चेको वो दूध पच नहीं पाता और बच्चे को कब्ज का शिकार होना पड़ता है।

2. सूखा अन्न: सूखा अन्न शुरू करने के लिए बच्चे की उम्र पर भी ध्यान देना होता है यदि बच्चा 6 माह से कम उम्र का है तो उसे सूखे अन्न न दे। ऐसा करने से उसके पेट में वो खाना सुख जाता है और शिशु उसे पचा नहीं पाता।

3. बाहरी वातावरण का प्रभाव: कई बार आप बहार कही घूमने जाते है तो भी शिशु पर काफी प्रभाव पड़ता है अतः बाहरी वातारण से बच्चे के पेट पर अधिक असर होता है और उसे मल त्यागने में काफी कष्ट होता है।

4. माँ का पोषण: यदि शिशु माँ का दूध ग्रहण करता है तो माँ को अपने खान पान का विशेष ध्यान देना होता है। यदि माँ कोई भी ऐसा भोजन ग्रहण करती हे जिससे उसे कब्ज हो तो बच्चे को भी कब्ज का सामना करना पड़ता है।

5. बच्चे की हिचकिचाहट: 4 से 9 साल के बच्चे अधिकतर अपने School या कही बहार का Toilet Use करने में हिचकिचाहट महसूस करते है इसीलिए वे खुलकर कही भी शौच नहीं कर पाते और पूरा दिन पेट दर्द से परेशान रहते है जिससे उन्हें मल त्यागने में काफी दर्द भी होता है।

6. फ़ास्ट फ़ूड (Fast Food) का अधिक सेवन: आज कल बच्चे को लुभाने के लिए फास्टफूड बाज़ारो में बड़ी तादात में बिक रहे है जैसे Pizza,Burger,Sandwich,Frenchfri और भी बहुत कुछ जिसे आजकल 5 से 10 साल के बच्चे खाना बहुत पसंद करते है। और ये कब्ज होने का सबसे बड़ा कारण बन चूका है क्योंकि ये खाना पचने में बहुत समय लेता है जो बच्चों की सेहत के लिए हानिकारक भी सिद्ध हो चुके है।

7. पानी की कमी: पानी हमारी बॉडी को हाइड्रेट रखता है इसीलिए पानी समय पर न पीने से और पूरी मात्रा न लेने से बच्चों में Minerals की कमी हो जाती है और उन्हें कब्ज की शिकायत रहती है।

8. समय पर भोजन न करना : अधिकतर 6 से 9 साल के बच्चे खेल में इतने खो जाते है की उन्हें भूख का एहसास ही नहीं होता इसिलए उनके खाने का Routine Change हो जाता है और पेट साफ़ नहीं हो पाता।

9. अधिक डेरी उत्पादन खाना: अधिक देरी उत्पादन खाने से भी बच्चो को खाना पचाने में काफी दिक्कत होती जिसकी वजह से वो ठीक से मल नहीं त्याग पाते और उनका पेट सख्त हो जाता है और उन्हें कब्ज हो जाती है।

10. समय पर न सोना : कई बार बच्चे अपने परिवार के साथ व माता पिता के साथ खेलना चाहते है ये अच्छी बात है मगर ऐसा निरंतर होता रहा तो बच्चों को देर तक जागने की आदत हो जाती है और इस वजह से वो देर तक सोते भी है और उनका पेट साफ़ न होने से परेशानी शुरू हो जाती है।

घरेलू उपचार और परहेज :

बच्चो की कब्ज के इलाज के लिए हमारे पास बहुत से ऐसे घरेलू उपचार है जिनकी वजह से बच्चे को कब्ज की शिकायत नहीं रहती और बच्चे पूरा दिन तनाव मुक्त अपने बचपन को Enjoy कर सकते है। और ये इलाज आपको अपने घर में ही मिल जायेगा जिससे आपके बच्चे को कोई Side Effects होने का खतरा भी नहीं होगा।

शहद : शहद एक बहुत ही बहुत गुणकारी पदार्थ है इसे बच्चो को देने से उन्हें कब्ज की शिकायत दूर हो सकती हैक्योकि इसका सेवन करने से भोजन और गेस्ट्रिक रस का ऊपर से कोई दुष्प्रभाव नहीं होता जिसकी वजह से बच्चो को एसिडिटी नहीं होती और उनका पेट साफ़ रहता है। लेकिन ध्यान रहे बच्चो को कभी ज़्यादा दिन पुराना शहद न खिलाये व खुला शहद बच्चो को न दे इससे बच्चे का पेट ख़राब हो सकता है। कोशिश करे की बच्चे को दिया जाने वाला शहद 1 महीने में ही ख़तम हो जाये।

सेवन का प्रकार :

*. बच्चे को शहद ओटमील में मिलकर भी सकते है।
*. दूध में चीनी प्रयोग न करके शहद मिलकर भी बच्चे को दे सकते।
*. कब्ज के दौरान बच्चे को स्मूदी में शहद डालकर भी दे सकते है इससे पेट जल्दी साफ़ होगा।
*. बच्चे को थोड़ा थोड़ा शहद दे सकते है पर अधिक मात्रा में नहीं बहुत कम मात्रा में।

हल्दी : हल्दी एक Inflammation Property है जो अधिकतर बीमारी का इलाज़ भी है ठीक उसी तरह हल्दी बच्चो के लिए लाभकारी है क्योकि हल्दी एक जड़ी बूटी है जिसे खाने में भी इस्तेमाल किया जाता है। हल्दी कई रोगो का इलाज है आयुर्वेदो के मुताबिक़ हल्दी बच्चो की कब्ज का भी रामबाण इलाज है लेकिन इसे केवल 3 से अधिक उम्र के बच्चो को ही सेवन करने के लिए दे सकते है क्योंकि हल्दी गरम होती है और शिशुओं को देने पर उन्हें दस्त भी हो
सकते है।

सेवन का प्रकार :

*. 3 से अधिक उम्र के बच्चो को ही दे।
*. दूध में आधा चम्मच से भी कम मात्रा डाले या फिर एक Pinch का प्रयोग करे।
*. हल्दी का प्रयोग करने से पहले आप Child Specialist से भी Consult कर सकते है।

बादाम: बादाम 7 Caloric से भरा होता है और इसमें Protein और Fiber भरपूर मात्रा में होता है और बच्चो के लिए बहुत ही लाभदायक सिद्ध भी हुआ है। इसे खाने से बच्चों को बहुत से फायदे होते है जैसे हड्डियों और दांतो को मजबूत बनाता है, बच्चो में Immunity Power Strong करता है। बादाम में Fatty Acid बच्चो को बड़े होने में मदद करता है। ठीक उसी तरह बादाम बच्चों की पाचन क्रिया को भी अच्छा बनाता है और इसमें मौजूद Fiber बच्चो में कब्ज की शिकायत दूर करता है। इसीलिए आप अपने बच्चों को बादाम नियमित रूप से दे सकते है।

सेवन का प्रकार :

*. रात को बादाम भिगोकर रख दे और सुबह बच्चों को नाश्ते के साथ दे सकते है।
*. लगभग 6 माह के होने बाद बच्चे को रातभर भीगे हुए बादाम को छिलका हटा कर व उन्हें पीस कर दे ताकि बच्चो को जल्दी हजम हो जाये और खाते वक़्त गले में न फसें।
*. शिशु को बादाम की कितनी Quantity देनी है ये अगर आपको पता है तो बहुत अच्छी बात है अन्यथा आप डॉक्टर से सलाह लेकर इसकी शुरुआत कर सकती है।

बच्चों को कब्ज ( Constipation ) में परहेज इस प्रकार करना चाहिए :

बच्चो में कई कारण से कब्ज की शिकायत हो जाती है और इसके बहुत से कारण हम आपको पहले ही बता चुके है जिसमे बच्चो के खान पान पर ध्यान देना बहुत ज़रूरी है। बच्चो को उल्टा सीधा खाने की वजह से भी कब्ज हो जाती है। जिसमे कुछ बहुत ही प्रमुख है जो उन्हें नहीं देने चाहिए।

*. फ़ास्ट फ़ूड ( Avoid Fast Food To Offer Your Kids) : फ़ास्ट फ़ूड बच्चो के लिए बहुत ही हानिकारक होते है जैसे Burger, Pizza, या Noodles आदि मैदे से बनी बहुत से खाद्य पदार्थ है जिन्हे आजकल बच्चे ज़्यादा मात्रा में खाना पसंद करते है। इसी वजह से बच्चो में Calcium, Vitamin A, B,C,D और E जैसे पोषक तत्वों की कमी हो जाती है और बच्चो में बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। इसी के साथ बच्चो का Metabolism System भी ख़राब हो जाता है और खाना पचने में दिक्कत होती है और पेट की समस्या शुरू हो जाती है। इसीलिए अपने बच्चो को फ़ास्ट फ़ूड खाने से रोके।

*. केमिकल युक्त पेय पदार्थ ( Stop The Chemical Beverages To Offer Your Kids): बच्चे आज कल Cold- Drink पीना बहुत पसंद करते है लेकिन बच्चो के लिए ColdDrinks पीना बहुत ही हानिकारक सिद्ध हो सकता है। क्योकि इनमे अधिक मात्रा में केमिकल होता है जो हमारे शरीर में पानी की कमी कर देता है जिसकी वजह से बच्चो की कब्ज की बहुत अधिक समस्या होनी शुरू हो जाती है। इसिलए अपने बच्चो को ऐसे सभी Chemical Beverages से परहेज कराये।

*. पैकेट बंद ( Do Not Purchase Pasteurize Food For Your Kids) : पैकेट बंद खाने की बहुत सी चीज़े आजकल बाजार में ज़ोरो पर बिक रही है जैसे Chocolates, Chips, Toffee, और भी बहुत सी केमिकल युक्त खाने की चीज़े जो बच्चो को बहुत पसंद होती है। जैसे Snacks और Cookies बच्चो को अधिक पसंद होते है और बच्चे इन्हे हर रोज़ खाना पसंद करते है। लेकिन क्या आप जानते है कि ये बच्चो के लिए कितनी हानिकारक होती है।

Research के मुताबिक पैकेट बंद खाद्य पदार्थ बच्चो में बहुत सी बीमारिया पैदा करती है जैसे चिप्स आदि में Fat और Calories अधिक मात्रा में होती हैं और 2015 की रिसर्च में ये बताया गया है की आलू से बने चिप मोटापे की खास वजह है जिससे बच्चो Digestion Process और Metabolism सिस्टम बिगड़ता है।

यहाँ तक की चिप्स में Vitamin और Minerals बहुत कम मात्रा में पाया जाता है जिस वजह से बच्चो को कब्ज की समस्या शुरू हो जाती है। इसीलिए इस तरह के किसी भी प्रकार की हानिकारक चीज़ो को अपने बच्चो से दूर रखे और उन्हें Healthy Food और घर पर बने खाने की आदत डाले।

बच्चो की उम्र के हिसाब से दे उन्हें पौष्टिक आहार :

नवजात शिशु से लेकर से लेकर 4 साल के बच्चे का आहार :
नवजात शिशु का 6 महीने तक विकास होने का समय होता है और इस दौरान शिशु के लिए माँ के दूध से अच्छा और पौष्टिक आहार कोई नहीं होता। माँ का दूध बच्चे के लिए बहुत लाभदायक है क्योकि इसमें लेक्टोफोर्मिन (Lectoformin )नमक तत्व पाया जाता है जिसमे लोह तत्व पाया है और ये बच्चे की आंतो को रोगाणुओं से मुक्त\रखता है। माँ का दूध बच्चे को पचाने में आसानी होती है उसे कब्ज की शिकायत भी नहीं होती और बच्चे का पेट साफ़ रहता है।

*. 4 से 6 माह के शिशु का आहार : इस उम्र में शिशुओं को Semi-Solid आहार देना सही रहता है जैसे फल सब्जियां आदि Crush करके मतलब मसल कर दे सकते है ताकि बच्चे जल्दी हजम कर सकते है और बच्चे को कब्ज भी नहीं रहती।

*. 7 से 8 माह के शिशु का आहार : इस उम्र में भी बच्चे को कब्ज हो जाती है इसीलिए उसकी डाइट का विशेष ध्यान रखना होता है तो उसे थोड़ी थोड़ी मात्रा में अंडे का सेवन करा सकते है, उबले हुए आलू, फलो का जूस, केला, आटे से बने बिस्किट्स आदि भी दे सकते है और अपने शिशु को इस उम्र में पानी पिलाना ना भूले ताकि बच्चे के पेट में ऐठन न हो और वह कब्ज से परेशांन ना हो।

*. 9 से 12 माह के शिशु का आहार: इस उम्र में बच्चे को कब्ज से निजात मिले इसके लिए आपको उसके पेट के बारे सोचते हुए उसे खिचड़ी व इसमें दो तरह की दाल मिलकर खिलाये हल्का नमक डालकर। आप उसे उबली गाजर में घी मिलकर खिलाये तो इससे बच्चे का पेट Smoothly साफ़ होता है और पूरा दिन खुश रहता
है।

*. 1 साल से 2 साल के बच्चे के आहार : 1 साल से 2 साल के बच्चे के खाने में आयरन, प्रोटीन और कैल्शियम भी Add करे और इसके लिए आप उसे टोफू भी दे सकते है। एक साल के बच्चे के लिए केवल 56 Gram टोफू की मात्रा ही उचित है। अगर बच्चे को सोया से किसी प्रकार की एलर्जी है तो आप इसे Avoid कर सकती है।

इसकी जगह आप उसे दलिया व ओट्स अवश्य दे ओट्स में बहुत Fiber होता है जो बच्चो का पेट साफ़ करने में मदद करता है। इसी के साथ आप दूध और दही भी दे सकती है इससे उसका साफ़ होगा बच्चे को कब्ज की शिकायत नहीं रहेगी साथ ही वह Active भी रहेगा।

*. 2 से 3 साल के बच्चे का आहार : इस उम्र में बच्चे को और भी पौष्टिक खाने की आवश्यकता होती है क्योकि वह खेलखुद में अपनी Energy Use करता है इसीलिए आप उसे Butter , मेथी का परांठा , आलू का परांठा व एक गिलास दूध देना न भूले इससे उसे कैल्शियम मिलेगा। आप उसे Salad और Juice भी दे इससे उसको पेट दर्द की और गैस की भी Problem नहीं होगी।

*. 3 से 4 साल के बच्चे का आहार : इस उम्र में आप अपने बच्चे को Protein और Fiber की भरपूर मात्रा दे जैसे मसूर की दाल , अंडा, दूध में बना ओट्स या फिर नमकीन ओट्स आदि। इसके साथ सब्जी रोटी , दही व सलाद का सेवन करने की आदत डाले इससे आपका बच्चा पूरा दिन Actively खेलेगा और पेट की समस्या से दूर रहेगा।

इसके बाद अपने सभी उम्र के बच्चे को Normal Diet दे सकते है मगर याद 12 साल तक के बच्चे को ज़्यादातर माँ को अपने हाथो से ही खाना देना होता है तो इसिलए कोशिश करे 12 साल तक के बच्चे को भरपूर मात्रा में Fiber, Protein, Iron और Calcium बराबर मात्रा में मिलता रहे। इस उम्र के बाद बच्चे अपनेआप खाना लेना सीख जाते है बस ध्यान रहे की उनकी Diet एक Healthy Diet हो।

तो आज का हमारा ये article Home Remedies For Constipation In Kids In Hindi, बच्चों (शिशुओं) में कब्ज़ के लक्षण कारण घरेलू उपचार और परहेज आपके बच्चो के लिए काफी हद तक लाभदायक सिद्ध होगा.

हम उम्मीद करते है कि अधिकतर सभी महिलाओं को हमारा ये Article baccho me kabz ke kya karan hai पसंद आएगा। comment करके हमें बताना न भूले। आगे भी आपकी और आपके बच्चों की Health को ध्यान में रखते हुए हम इसी तरह के article लाते रहेंगे। धन्यवाद ।

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