मिर्गी (अपस्मार) के कारण व उपचार Epilepsy Mirgi Causes Symptoms Treatment In Hindi

मिर्गी (अपस्मार) के कारण व उपचार Epilepsy Mirgi Causes Symptoms Treatment In Hindi

Epilepsy Mirgi Causes Symptoms Treatment In Hindi

अपस्मार क्या है ?

अपस्मार (Epilepsy) केन्द्रीय तन्त्रिका तन्त्र का एक विकार है जिसमें मस्तिष्क की क्रियाशीलता सामान्य हो जाती है एवं असामान्य व्यवहार व संवेदनों के दौरे पड़ते हैं एवं कभी-कभी बेहोशी भी छा सकती है। यह कभी भी किसी को भी हो सकता है।

अपस्मार के लक्षण क्या है ?

एक बार दौरे पड़ने से व्यक्ति में अपस्मार की पुष्टि नहीं हो जाती, साधारणतया अपने आप कम से कम दो दौरे अपस्मार के होने की पुष्टि करते हैं, अपस्मार के प्रकार आदि के अनुरूप इसके लक्षणों में अत्यधिक भिन्नताएँ हो सकती हैं क्योंकि दौरों में मस्तिष्क के समन्वयन की किसी भी प्रक्रिया पर प्रभाव पड़ सकता है परन्तु अधिकांश मामलों में एक व्यक्ति को हर बार समान प्रकार का दौरा होता है जिससे उसके सभी दौरों में लक्षणों में समानता हो सकती है..

1. दौरे के दौरान कुछ सेकण्ड्स बस टकटकी लगाये ताकना

2. भुजाओं अथवा पैरों में बारम्बार मरोड़ अथवा इनकी गतियों में अनियन्त्रणीय झटके

3. अस्थायी मतिभ्रम

4. यदा-कदा अचेत हो जाना

5. भय, दुष्चिंता (एन्ज़ायटी) अथवा डेजा वू जैसे मानसिक लक्षण, डेजा वू में ऐसी अनुभूति होती है कि व्यक्ति उस स्थान अथवा स्थिति में पहले भी रह चुका है। चिकित्सक यह देखते हुए साधारणतया दौरों को फ़ोकल अथवा जनरॅलाइज़्ड के रूप में वर्गीकृत करता है कि असामान्य मस्तिष्क-क्रियाशीलता कैसे आरम्भ हुई.

Epilepsy Mirgi Causes Symptoms Treatment In Hindi

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Epilepsy

1. फ़ोकल दौरे – इसमें दौरे मस्तिष्क के किसी एक भाग में असामान्य क्रियाशीलता से उत्पन्न होते हैं। इन दौरों को आंशिक दौरे भी कहा जाता है, इनके दो उप-प्रकार हैं –

बेहोशीरहित फ़ोकल दौरे – इन्हें सरल आंशिक दौरे कहते हैं, इनमें बेहोशी नहीं आती। इनमें भावनाओं में बदलाव हो सकता है अथवा देखने, सूँघने, अनुभव करने, स्वाद अथवा सुनने के तरीके में परिवर्तन आ सकता है। इसमें शारीरिक भाग (जैसे कि भुजा अथवा पैर) में अनैच्छिक झटके भी आ सकते हैं एवं अपने आप संवेद्य लक्षण, जैसे कि झुनझुनी, सिर चकाराना एवं प्रकाष चमकने जैसी अनुभूति सम्भव।

व्यवधानित चेतना युक्त फ़ोकल दौरे – इन्हें जटिल आंशिक दौरे भी कहा जाता है, इनमें चेतना अथवा जागृति खो जाती है अथवा उसमें परिवर्तन आ जाता है। जटिल आंशिक दौरे के दौरान हो सकता है कि व्यक्ति आकाश की ओर घूरने लगे एवं परिवेश से सामान्य प्रतिक्रिया न करे अथवा कुछ गतियाँ बारम्बार करने लगे, जैसे कि हाथ रगड़ना, चबाना, निगलना अथवा घेरों में चलना।

फ़ोकल दौरों के लक्षण अन्य तन्त्रिकीय विकारों (माइग्रैन, नार्कोलेप्सी अथवा मानसिक रुग्णत्व आदि) के लक्षणों जैसे लग सकते हैं। अन्य विकारों से असमंजस को सुलझाने के लिये भली-भाँति परीक्षण व जाँचें इमिशन होंगी।

2. जनरॅलाइज़्ड दौरे – ये दौरे मस्तिष्क के सभी भागों की भागीदारी से पनपे होते हैं। इनके छह प्रकार हैं – एब्सेन्स दौरे, निक दौरे, एटानिक दौरे, क्लानिक दौरे, मायोक्लानिक दौरे, टानिक-क्लानिक दौरे।

डॉक्टर से मिलने पर ये बिन्दु स्पष्ट करें

*. दौरा पाँच मिनट्स से अधिक अवधि तक रहा ?
*. दौरा रुकने के बाद श्वासोच्छ्वास अथवा चेतना कैसे लौटी ?
*. दूसरा दौरा कितने समय बाद आया ?
*. तेज बुखार रहा?
*. हीट एग्ज़ाशन अनुभव हुआ, अर्थात् तेज पसीना व धड़कन बढ़ना ?
*. क्या आप गर्भवती हैं या आपको मधुमेह है अथवा दौरे के दौरान आपने स्वयं को चोट पहुँचा ली ? इत्यादि।

मिर्गी की जाँच एवं उपचार

अपस्मार की जाँच के लिये संक्रामक रोग की उपस्थिति के चिह्नों, यकृत व वृक्क कार्य, रक्त-ग्लुकोज़ स्तर इत्यादि का परीक्षण किया जाता है तथा अपस्मार को अधिक सूक्ष्मता से जाँचने के लिये इलेक्ट्रोएन्सॅफ़ैलोग्रॅम (ईईजी) की सहायता प्राप्त की जाती है। इस जाँच के समय व्यक्ति को कोई विषेष कार्य करने को सौंपा जा सकता है अथवा उसकी निद्रा में यह जाँच करनी इमिशन हो सकती है।

इस जाँच में इलेक्ट्राड्स द्वारा मस्तिष्क की वैद्युत् सक्रियता को अंकित किया जाता है। सीटी स्कॅन, एमआरआई, पाज़िट्रान इमिषन टोमोग्रॅफ़ी, सिंगल-फ़ाटान इमिशन कम्प्यूटराइज़्ड टोमोग्रॅफ़ी जैसी विभिन्न इमेजिंग जाँचों में अर्बुद (ट्यूमर) व अन्य असामान्यताएँ नज़र आ सकती हैं जिनसे दौरे पड़ सकते हों।

औषधियों अथवा कभी-कभी शल्यक्रिया से उपचार की इमिशनता पड़ सकती है, कुछ व्यक्तियों को आजीवन उपचार कराना इमिशन हो सकता है जबकि कुछ रोगियों में यह रोग समय के साथ समाप्त हो जाता है। कुछ बच्चों में अपस्मार आयु के साथ बढ़ता जाता है। वेगस नर्व स्टिम्युलेटर नामक एक उपकरण शल्यात्मक रूप से छाती में त्वचा के भीतर लगाया जा सकता है एवं वैद्युत् रूप में उस तन्त्रिका(नर्व) को उद्दीप्त (स्टिम्यूलेट) किया जाता है जो गर्दन से होकर गुजरती है।

मिर्गी के कारण व जोख़िक कारक

लगभग आधे रोगियों में अपस्मार का कोई स्पष्ट कारण ज्ञात नहीं हो पाया है। अन्य आधे रोगियों में विभिन्न कारकों का अस्तित्व नज़र आया है, जैसे..

*. बाल्यावस्था में दौरे – बचपन में तेज बुखार आते रहने अथवा बने रहने से दौरों का सम्बन्ध कभी-कभी देखा गया है। तेज बुखार के कारण जिन बच्चों को दौरे पड़ते हों उन्हें साधारणतया अपस्मार नहीं होता परन्तु अपस्मार का जोख़िम बढ़ जाता है यदि बच्चे को लम्बे-लम्बे दौरे पड़ते हों अथवा तन्त्रिका तन्त्र-सम्बन्धी कोई असामान्य स्थिति हो अथवा परिवार में अपस्मार कभी किसी को रहा हो।

*. आयु – अपस्मार का आगमन बच्चों व बुज़ुर्गों में अधिक देखा गया है तथा डिमेन्षिया वृद्धों में अपस्मार के जोख़िम को विशेष रूप से बढ़ाता देखा गया है परन्तु अपस्मार वैसे तो किसी भी आयु में हो सकता है।

*. आनुवंशिक प्रभाव – जिस प्रकार के अपस्मार का अनुभव हुआ या मस्तिष्क का जो भाग प्रभावित है उस अनुसार पारिवारिक अतीत का अवलोकन करने पर इस रोग की भी वंशागति सामने आ सकती है। अनुसंधाताओं ने कुछ प्रकार के अपस्मार को विशिष्ट जीन्स से जोड़कर समझा है परन्तु अधिकांश रोगियों में तो ये अनुवंशक अपस्मार लाने के कारण के एक भाग मात्र ही दिखे।

हो सकता है कि कुछ अनुवंशक व्यक्ति को ऐसी पारिवेशिक स्थितियों के प्रति अधिक संवेदनशील बना देते हों जिनसे दौरे प्रेरित हो सकते हैं। इस प्रकार पारिवारिक अतीत का विष्लेषण सहायक है- परिवार में अथवा निकट पूर्वजों में किसी को यदि अपस्मार हो चुका हो तो दौरे अथवा अन्य सम्बन्धित विकृति विकसित होने की सम्भावना आप में अधिक हो सकती है।

*. संक्रामक रोग – मेनिन्जाइटिस, एैड्स व वायरल एन्सॅफ़ेलाइटिस जैसे संक्रामक रोगों से अपस्मार हो सकता है। मस्तिष्क के संक्रमण के अनेक रूप सम्भव हैं, मेरुदण्ड में अथवा मस्तिष्क में सूजन लाने वाले मेनिन्जाइटिस व अन्य संक्रमणों से अपस्मार का जोख़िम बढ़ जाता है।

*. मस्तक-अभिघात् (हेड-ट्रामा) – वाहन-दुर्घटना अथवा अन्य अभिघातात्मक चोट से अपस्मार हो सकता है। तीन-चारपहिया इत्यादि वाहनों में सीट बेल्ट व दुपहियाओं में हेल्मेट पहनकर निकलने से मस्तिष्क को पहुँचने वाली चोटों अथवा मस्तक-चोटों से काफ़ी सीमा तक बचा जा सकता है; कुछ मामलों में मस्तक में चोट से अपस्मार होता पाया गया है।

*. मस्तिष्क-स्थितियाँ – कुछ मस्तिष्क-स्थितियाँ मस्तिष्क को क्षति पहुँचा सकती हैं, जैसे कि ब्रैन-ट्यूमर अथवा स्ट्रोक्स, इन कारकों से भी अपस्मार हो सकता है। स्ट्रोक के कारण होने वाला अपस्मार 35 वर्ष से अधिक आयु वालों में अधिक देखा गया है। स्ट्रोक व अन्य अनेक प्रकार के रक्त वाहिकात्मक रोगों से मस्तिष्क क्षतिग्रस्त होने की आशंका रहती है जिससे अपस्मार प्रेरित हो सकता है।

हर प्रकार से धूम्रपान, मद्यपान व तम्बाकू उत्पादों सहित अन्य मादक द्रव्यों से दूरी बरतते हुए ये आशंकाएं घटायी जा सकती हैं.. पोषक आहार ग्रहण करें, शारीरिक सक्रियता नैसर्गिक रूप से बढ़ायें।

*. जन्मपूर्व चोट – प्रसव से बाहर निकलने से पहले गर्भस्थ स्थिति में शिशु का मस्तिष्क क्षति पहुँचने के प्रति संवेदनशील रहता है जो कई कारकों से उसे पहुँच सकती है, जैसे कि माता को किसी संक्रमण से, अपर्याप्त पोषण से अथवा आक्सीजन-अल्पता से। इस मस्तिष्क-क्षति के परिणाम स्वरूप अपस्मार अथवा सेरेब्रल पाल्सी सम्भव है।

*. परिवर्द्धनात्मक विकार – अपस्मार आयु-परिवर्द्धन से सम्बन्धित विकारों से जुड़ा पाया जा चुका है, जैसे कि आटिज़्म व न्यूरोफ़ाइब्रोमेटोसिस।

*. रुधिर-शर्करा में भारी कमी

*. मस्तिष्क को आक्सीजन-आपूर्ति पर्याप्ततया न हो पाना

मिर्गी मे जटिलताएँ

जीवन के किसी पड़ाव में किसी समय दौरा पड़ चुका हो तो हो सकता है कि ऐसी परिस्थितियाँ आपके एवं अन्यों के लिये ख़तरनाक हों..

*. गिरना व फिसलना – यदि दौरे में फिसलकर गिर चुके हों जिससे मस्तक में या शरीर की किसी अस्थि में चोट पहुँच सकती है।

*. वाहन-दुर्घटना – वाहन अथवा अन्य यंत्र-संचालन से जागृति कम हो जाने के दौरान कोई आन्तरिक क्षति पहुँच सकती है।

*. गर्भावस्था जनित जटिलताएँ – गर्भावस्था में दौरा पड़ा हो तो माता व शिशु दोनों को ख़तरा बढ़ जाता है तथा यदि अपस्मार-रोधी कहलाने वाली औषधियों का सेवन किया तो जन्मजात विकारों का जोख़िम उपज आता है। अपस्मार की स्थिति में गर्भधारण करने से बचना श्रेयस्कर है।

*. भावनात्मक स्वास्थ्यगत प्रसंग – अपस्मार से ग्रसित व्यक्तियों में मनोवैज्ञानिक समस्याएँ होने की आशंका अधिक रहती है, जैसे कि अवसाद, चिंता एवं आत्मघाती विचार व व्यवहार। समस्याओं का कारण किसी स्थिति को ठीक से सँभाल न पाना भी हो सकता है एवं औषधीय दुष्प्रभावों के रूप में भी समस्याएँ उभर सकती हैं।

*. डूबना – अपस्मार रहित व्यक्ति की अपेक्षा अपस्मार रोगी के डूबने की आशंका 15 से 18 गुनी अधिक पायी गयी है, पानी में दौरे पड़ने की सम्भावना रहती है।

*. मृत्यु – अपस्मार रोगी को आकस्मिक मृत्यु की आशंका रहती है जिसका कारण हो सकता है कि ज्ञात न हो पाये।

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