चिकनगुनिया की बीमारी एवं विविध उपचार

चिकनगुनिया की बीमारी एवं विविध उपचार Chikungunya Symptoms Treatment In Hindi

Chikungunya Symptoms Treatment In Hindi

चिकनगुनिया है क्या :

यह संक्रमित मच्छरों द्वारा मनुष्यों को होने वाला एक विषाण्विक रोग है। यह चिकनगुनिया एक आरएनऐ-विषाणु है जो टोगाविरिडी कुल के अल्फ़ावायरस वंश से सम्बन्धित है। यह विषाणु मादा एडीज़ एैजिप्टी व एडीज़ अल्बोपिक्टस मच्छरों के माध्यम से फैलता है जो कि डेंगी जैसे अन्य मच्छर-संवाहक रोगों की भी वाहक होती पायी गयी हैं।

चिकनगुनिया को संधि-ज्वर अथवा हड्डियों का बुखार भी कहा जाता है क्योंकि इसके प्रमुख लक्षण जोड़ों में दर्द व बुखार हैं। अधिक तापक्रम वाले क्षेत्रों में मच्छर अधिक होने से चिकनगुनिया सहित अन्य मच्छर-वाहक रोग भी अधिक पाये जाते हैं, उत्तर भारत में इनके रोगी कम ही नज़र आते हैं।

Chikungunya Symptoms Treatment In Hindi

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Chikungunya

चिकनगुनिया के मुख्य लक्षण :

*. ज्वर(बुखार)
*. संधियों (जोड़ों) में तेज पीड़ा
*. पेशीय कष्ट
*. सिरदर्द
*. मितली
*. थकान
*. त्वचा पर चकत्ते

हो सकता है कि चिकनगुनिया के लक्षण सरलता से न दिखें, वैसे प्रायः चिकनगुनिया-संक्रमित मच्छर द्वारा काटे जाने के 3-12 दिवसों में लक्षण प्रकट होने लगते हैं।

उपचार से पहले चिकित्सक द्वारा बरती जाने वाली सावधानी- चिकनगुनिया के कई लक्षण डेंगी व ज़ीका जैसे हो सकते हैं इसलिये ठीक से जाँच-परखकर ही उपचार का प्रयास करें। एन्ज़ाइम-लिंक्ड इम्युनोसार्बेण्ट एस्सेज़ (एलाइज़ा), रिवर्स ट्रांस्क्रिप्टेज़-पालिमरेज़ चैन रिएक्शन इत्यादि जाँचों द्वारा चिकनगुनिया होने की पुष्टि की जा सकती है।

चिकनगुनिया का उपचार :

इस रोग का कोई उपचार अभी तक उपलब्ध नहीं हो सका है। उपचार के दौरान बस लक्षणों में राहत प्रदान करने के प्रयास किये जाते हैं। चिकनगुनिया से बचे रहने के लिये कोई टीका भी उपलब्ध नहीं है।

मन से कोई औषधि सेवन न करते हुए विधिवत् जाँच कराकर चिकित्सक के लिखे अनुसार औषधीय सेवन करें। एस्पिरिन तो भूलकर भी न लें। तरल पदार्थों (पानी, फल-रस) का सेवन बढ़ायें ताकि चिकनगुनिया के कारण शरीर में निर्जलीकरण न हो पाये।

चिकनगुनिया के उपचार में सहायक घरेलु नुस्खेः चूँकि चिकनगुनिया का कोई उपचार उपलब्ध नहीं है एवं इसके लक्षणों में मुख्यतया बुखार व जोड़ों में दर्द होता है तो इन दो लक्षणों की नाशक जड़ी-बूटियों का सेवन सम्बन्धित प्रामाणिक वैद्य से पूछकर निर्धारित अवधि व मात्रा में किया जा सकता है।

औषधीय सेवन से पहले चिकनगुनिया की जाँच अवश्य करा लैवें ताकि कहीं ऐसा न हो कि औषधियों के प्रभाव में रोग-लक्षण दब जायें एवं आपको पता ही न चल सके कि भीतर चिकनगुनिया के विषाणु हैं।

ज्वरनाशक :

*. विभिन्न रोगों के उपचार की चमत्कारी औषधि तुलसी चिकनगुनिया से आये ज्वर का भी नाश करने में कुशल है।

*. लहसुन की एक छोटी अथवा निगलने योग्य मुलायम कली को पानी से साथ दिन में एक-दो बार निगलने से बुखार में राहत मिलती है (वैसे इस विधि से लहसुन-सेवन अन्य रोगों से भी दूर रखने में सहायक है)।

*. गिलोय की बेल भी घर में सरलता से लगा सकते हैं जिसकी टहनियों के छोटे-छोटे टुकड़े पानी में उबालकर पीने से बुखार में बहुत राहत मिलती है। यह बेल डाली से भी उग आती है।

*. दालचीनी की छाल पानी में उबालकर पीयें एवं अन्य ठोस व द्रव आहारों में इसे चूर्ण के रूप में मिलायें।

पीड़ाहारी :

निर्गुण्डी- यह सूजन को घटाती है।

अजवायन – दर्द दूर करने के लिये विशेष रूप से अजवायन-जल काफ़ी उपयोगी पाया गया है। आसपास उपलब्ध नीलगिरि की पत्तियों को पानी में उबालकर संधियों में मलें। दाल-सब्जियों में अदरख की मात्रा बढ़ायें।

चिकनगुनिया से बचाव व सावधानियाँ :

*. मच्छरों के पनपने वाले स्थानों की साफ़-सफ़ाई का ध्यान रखें, इस हेतु व विस्तार के लिये देखें- डेंगी उपचार सम्बन्धी आलेख।

*. चिकनगुनिया के मच्छर दिन में काटते हैं, इसलिये सुबह, दिन व शाम के समय सोने वाले विशेष रूप से छोटे बच्चों, वृद्धों व बीमारों की अतिरिक्त देखरेख करनी आवष्यक है।

*. होटल इत्यादि में सजावट के लिये रखे जाने वाले पानी भरे पात्रों का पानी प्रतिदिन बदलें।

*. मच्छरदानी में सोयें।

*. मच्छरों के सम्भावित जन्मस्थलों की निगरानी आवश्यक है, अन्यथा चिकनगुनिया को महामारी बनने में देर नहीं लगती। आप कहीं भी आ-जा रहे हों आसपास जल की सतह पर नज़रें डालते हुए चलें कि कहीं मच्छरों के झुण्ड सतह पर तो नहीं अथवा उनके डिम्भक (जो कि शंकु-आकृति की इल्लियों जैसे दिखते व मुड़-मुड़कर तैरते हैं) तो नहीं तैर रहे।

*. यदि आसपास कहीं पानी सदैव (बारहमासी) भरा ही रहने वाला हो एवं मछली के रहने योग्य हो तो गम्बूज़िया मछली वहाँ छोड़ी जा सकती है जो समस्त प्रकार के मच्छरों के डिम्भक (लार्वा) खाना पसन्द करती है।

*. चिकनगुनिया के मच्छरों से बचने के लिये घर में एवं विशेष रूप से बाहर जाते समय विशेष रूप से हाथ-पैरों पर पूरी आस्तीन वाले कपड़े पहनें।

*. जाँच में यदि चिकनगुनिया पाया गया हो तो सर्वप्रथम रोगी विशेष सावधानी बरते कि उसे काटकर कोई मच्छर किसी दूसरे को न काटे, अन्यथा उसे भी चिकनगुनिया-संक्रमण हो सकता है।

*. चिकनगुनिया इत्यादि संक्रमणों के रोगियों को यात्राओं, विशेष रूप से विदेश यात्राओं से भी रोका जाता रहा है, वैसे यदि यात्रा आपातकालीन रूप से आवश्यक हो तो चिकित्सकीय निर्देशानुसार सुरक्षात्मक रूप में यात्रा की जा सकती है।

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