गाजर जूस पीने के 8 फायदे Carrot Juice Benefits in Hindi

गाजर जूस पीने के 8 फायदे Carrot Juice Benefits Side Effects in Hindi

Carrot Juice Benefits Side Effects in Hindi

गाजर भारत में सरलता से उपलब्ध होने वाली व पसंद की जाने वाली सब्जी है। गाजर वास्तव में एक पौधे की जड़ है जिसे विभिन्न रूपों में सेवन किया जाता है। गाजर विटामिन्स, खनिजों व रेशो में भरपूर होता है।

गाजर में विटामिन-ऐ व दो केरोटिनायड्स के अलावा कैल्सियम, फ़ास्फ़ोरस, Vitamin – C, फ़ोलेट, विटामिन-ई एवं विटामिन-के की भी मात्राएँ होती हैं तथा कुछ परिमाणों में लौह व अन्य खनिजो सहित विभिन्न बी-विटामिन भी होते हैं।

यह Antioxidants में समृद्ध होता है। कई पौधों में पाये जाने वाले एण्टिआक्सिडेण्ट्स शरीर से मुक्तमूलकों (फ्ऱी रेडिकल्स) को हटाने में उपयोगी हैं, मुक्तमूलक वास्तव में ऐसे अस्थिर अणु होते हैं जो शरीर में संचित होते रहते हैं एवं कोशिकाओं को क्षति पहुँचाते रहते हैं। काले गाजर में एंथोसायनिन्स नामक शक्तिशाली Antioxidants होते हैं।

दूषित आहार-विहार व अन्य आन्तरिक व बाहरी कारणों से मुक्तमूलक बनते रहते हैं. ये शरीर के बाहर अपने आप निकल जाते हैं परन्तु आहार में एण्टिआक्सिडेण्ट्स सेवन करने से इन्हें बाहर निकालना कुछ सरल हो जाता है। लायकोपीन नामक गहरा लाल एण्टिआक्सिडेण्ट कैन्सर व हृदय रोग की आशंका घटा सकता है।

Carrot Juice Benefits Side Effects in Hindi

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Carrot Juice

नेत्र-ज्योतिवर्द्धक गाजर :

गाजर कोई जादुई औषधि नहीं है फिर भी यह अँधेरे में देखने में सहायक हो सकती है। कैसे ? क्योंकि रतौंधी (Night blindness) विटामिन-ऐ की कमी से होती है जिसकी पूर्ति गाजर से की जा सकती है क्योंकि इसमें विटामिन-ऐ बहुत मात्रा में सहज सुलभ रहता है।

बच्चों में अंधे होने का मुख्य कारण विटामिन-ऐ की कमी को माना जाता है तथा गाजर में ल्युटीन व ज़ीज़ेंथिन नामक एण्टिआक्सिडेण्ट्स होते हैं जो एक साथ मिलकर बुढ़ापे से सम्बन्धित मॅक्युलर डिजनरेशन (Macular Degeneration) को रोकने में सहायता कर सकते हैं जिसमें कि देखने की क्षमता क्षीण होने लगती है।

प्रोविटामिन्स के रूप में केरोटिन्स :

गाजर में अल्फ़ा व बीटा केरोटिन होते हैं जिनसे गाजर काफ़ी नारंगी जैसे रंग में नज़र आते हैं। शरीर आँतों के माध्यम से बीटा केरोटिन अवशोषित करता है व पाचन के दौरान विटामिन-ऐ में उसे बदल देता है।

इसी कारण लोग केरोटिनायड्स को प्रोविटामिन्स कहते हैं। गाजर के बीटा कॅरोटिन एवं अल्फ़ा केरोटिन दो ऐसे प्रोविटामिन ऐ एण्टिआक्सिडेण्ट्स शरीर की आवश्यकतानुसार विटामिन-ऐ में परिवर्तित होते जाते हैं।

कैन्सर :

शरीर में जितने अधिक मुक्तमूलक होंगे कैन्सरों की आशंका उतनी बढ़ी हुई होगी जबकि गाजर व अन्य भाजी-तरकारियों के एण्टिआक्सिडेण्ट्स शरीर में इन मुक्त मूलकों से लड़ते हैं, विशेष रूप से पीले, नारंगी व लाल वर्णकों (पिग्मेण्ट्स) वाले केरोटिनायड्स।

ल्युटीन व ज़ीज़ेंथिन इन केरोटिनायड्स के दो उदाहरण हैं ही। सन् 2015 में ‘Review of Studies’ में सुझाया गया कि केरोटिनायड्स में समृद्ध आहार का सेवन किया जाये तो प्रोस्टेट कैन्सर (Prostate Cancer) का जोख़िम घटता है।

सन् 2011 में शोधकर्ता इस निष्कर्ष पर पहुँचे कि धूम्रपान से होने वाले फेफड़ा-कैन्सर से होने वाली क्षति से कुछ सीमा तक बचाव में गाजर का रस उपयोगी हो सकता है।

इससे पहले सन् 2008 के एक मेटा-एनसलिसिस में ऐसा सामने आया कि विभिन्न केरोटिनायड्स का सेवन अधिक मात्रा में करने से फेफड़ों के कैन्सर का जोख़िम कम हो जाता है।

गाजर में पालिएसिटाइलीन्स नामक जैव-सक्रिय यौगिक ल्यूकेमिया (अस्थि-मज्जा व श्वेतरक्त कोशिका का कैन्सर) एवं अन्य कैन्सर्स से बचाव में सहायक हैं। सन् 2011 में अनुसंधाताओं ने पाया कि गाजर-रस के पोषकों से ल्यूकेमिया की कोशिकाएँ नष्ट हो सकती हैं।

पाचन-स्वास्थ्य :

गाजर में सेल्युलोज़, हेमिसेल्युलोज़ एवं लिग्निन नामक अघुलनषील रेशे होते हैं जो कोष्ठबद्धता (कब्ज़) की आशंका घटाते हैं एवं आँतों की गति को सामान्य रखने में सहायता करते हैं। सन् 2014 में 893 व्यक्तियों पर किये एक अध्ययन-अनुसार केरोटिनायड-सम्पन्न खाद्यों के अधिक सेवन से बड़ी आँत के कैन्सर की आशंका घट जाती है।

रक्तचाप एवं हृद्वाहिका-स्वास्थ्य (कार्डियोवेस्क्युलर-हेल्थ :

गाजर में उपस्थित रेशा एवं पोटेशियम रक्तचाप को ठीक करने में सहायक हो सकता है। American Heart Association’s का सुझाव है कि लोग कम नमक, कम सोडियम खायें तथा गाजर जैसे पोटेशियम-स्रोतों का अधिक सेवन करें।

पोटेशियम रुधिर-वाहिनियों को शिथिल करता है, उनमें ढीलापन लाता है जिससे उच्चरक्तचाप की आशंका कम होती है एवं अन्य हृद्वाहिकागत समस्याओं का जोख़िम भी घटता है।

सन् 2017 में एक Review में पाया गया कि अधिक रेशे खाने वाले व्यक्तियों में हृद्वाहिकागत रोगों की सम्भावना कम हो जाती है। अधिक मात्रा में रेशे खाने से लाडेन्सिटी लिपोप्रोटीन के स्तर घटाने में भी सहायता हो सकती है जो कि रुधिर में ‘हानिप्रद’ कोलेस्टॅराल होता है।

मधुमेह में हितकर :

गाजर में कुछ मिठास होने के बावजूद यह सबके लिये अच्छा होता है क्योंकि इसमें नैसर्गिक शर्कराएँ (नैचुरल शुगर्स) होती हैं एवं गाजर के कार्बोहाइड्रेट्स का बड़ा भाग रेशे के रूप में होता है।

गाजर में पेक्टिन नामक एक घुलनशील रेशा होता है जो कि शरीर में शर्करा व मण्ड (स्टार्च) के पाचन को धीमा रखता है जिससे रक्त का शर्करा स्तर एकदम से नहीं बढ़ पाता। उबला गाजर मधुमेह रोगियों के लिये और लाभप्रद रहता है।

नारंगी गाजरों में बीटा केरोटिन भी अधिक मात्रा में होता है गाजर उबालने से शरीर में जिसका अवशोषण कई गुना बढ़ जाता है। सन् 2018 में एक रिव्यू के अनुसार पता चला कि अधिक रेशो वाले आहार के सेवन से टाइप 2 डायबिटीज़ होने से बचाव सम्भव है।

अस्थियों के लिये अच्छा :

गाजर में विटामिन-के सहित कुछ Calcium व फ़ास्फ़ोरस होता है जो कि हड्डियों के लिये उपयोगी होते हैं एवं अस्थि-छिद्रण (ओस्टियोपोरोसिस) से बचाव करने में सहायता करते हैं।

प्रतिरक्षा-तन्त्र में उपयोगी गाजर :

विटामिन-सी के रूप में एक अन्य एण्टिआक्सिडेण्ट कोलेजन-उत्पादन को बढ़ावा देता है। कोलेजन हमारे शरीर के संयोजी ऊतक का एक मुख्य अवयव है एवं घाव भरने व शरीर को स्वस्थ रखने में आवश्यक भी।

प्रतिरक्षा-कोशिकाओं में भी vitamin c उपस्थित होता है एवं रोगों से लड़ने में सहायक होता है। बीमार व्यक्ति को विटामिन-सी की आवश्यकता बढ़ जाती है।

गाजर के प्रयोग में सावधानियाँ –

1. जहाँ तक हो सके अन्य सब्जियों, फलों इत्यादि जैसे गाजर को भी ताजे़ रूप में प्रयोग करें ताकि अधिक पोषक मिलें एवं परिरक्षक (Preservatives) से बचाव हो जाये।

2. गाजर में विटामिन-ऐ बहुत होता है परन्तु इसकी अति मात्रा विषाक्त होती है, त्वचा की रंगत नारंगी होना इसका एक लक्षण हो सकता है।

3. केरोटिनायड्स एवं विटामिन-ऐ वसाओं की उपस्थिति में अच्छे से अवशोषित होने का आकलन है, यदि ऐसा है तो गाजर का सेवन वसा के सुरक्षित खाद्यों के साथ करें, जैसे कि गिरियों, बीजों के साथ।

4. कुछ लोगों को गाजर के कुछ तत्त्वों से एलर्जी हो सकती है, यदि अलग-अलग समय पर गाजर खाने के बाद त्वचा में खुजली, चेहरे में सूजन, साँस लेने में परेशानी जैसे लक्षण अनुभव हों तो चिकित्सक से मिलें एवं गाजर का सेवन कम करें एवं हलवे इत्यादि के रूप में खायें, न कि कच्चे रूप में।

5. गाजर हो अथवा अन्य कोई पदार्थ रस के बजाय उसे साबुत रूप में रेशो सहित उपयोग में लाना अधिक उपयोगी रहता है।

6. गाजर व अन्य जो भी सब्जी-फल आप खायें हो सके जो उसका स्रोत आपको पता हो क्योंकि यदि उसे ख़राब मिट्टी-पानी में उगाया गया हो तो प्रदूषक तत्त्व आपके शरीर में आसानी से आ सकते हैं, गाजर जैसी भूमिगत खाद्य-फसलें भूमि से हानिप्रद तत्त्वों को शीघ्र अवशोषित कर सकती हैं।

तो ये थी हमारी पोस्ट गाजर जूस पीने के 8 फायदे Carrot Juice Benefits Side Effects in Hindi. आशा करते हैं की आपको पोस्ट पसंद आई होगी और Carrot Juice Benefits की पूरी जानकारी आपको मिल गयी होगी. Thanks For Giving Your Valueble Time.

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